
राज्य सरकार ने अब तबादलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध 15 जनवरी से लागू होगा। प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग ने बुधवार शाम इसका आदेश जारी किया है। आदेश राज्य के सभी निगमों, मंडलों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी लागू होगा। अब अतिआवश्यक तबादले भी मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद किए जा सकेंगे।
सरकार ने 23 मार्च 2022 के परिपत्र का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि तबादलों पर प्रतिबंध की अवधि में एपीओ या अन्य तरीकों से विभाग मनमर्जी से कार्मिकों को इच्छित स्थान पर पदस्थापित नहीं कर पाएंगे। ऐसा कोई प्रकरण सामने आता है तो संबंधित विभागाध्यक्ष और सचिव स्तरीय उच्चाधिकारी जिम्मेदार होंगे। तबादला अतिआवश्यक होने पर प्रशासनिक सुधार विभाग से परीक्षण और सक्षम स्तर से अनुमति के बाद ही किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि सरकार ने तबादलों से 30 जून, 2022 को रोक हटाई थी। करीब साढ़े छह माह तक तबादले हुए हैं। अब 10 दिन का समय है। आम तौर पर रोक के आदेश में इतना अंतर नहीं रहता है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस अवधि में तबादले हो सकते हैं। उधर, तृतीय श्रेणी शिक्षक तबादलों पर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के बयान के बाद आंदोलन कर रहे शिक्षकों की उम्मीद जगी थी। अब प्रतिबंध की घोषणा के साथ ही इस पर संशय रहेगा। अब जो भी तबादला आदेश होंगे, वे 15 जनवरी से पहले ही होंगे।
18 हजार शिक्षकों के हो चुके तबादले
शिक्षा विभाग में अभी तक सर्वाधिक कार्मिकों के तबादले किए गए हैं। पिछले सात माह में शिक्षा विभाग में 18 हजार तबादले हो चुके हैं। खास बात रही कि इस बार तबादलों को लेकर बड़ा विरोध सामने नहीं आया। हालांकि कुछ सूचियों में विधवाओं और दिव्यांगों के तबादले भी किए गए। लेकिन बाद में उन्हें संशोधित कर दिया गया। विभाग ने नवंबर में तबादलों के आवेदन लेना बंद कर दिया था। पुरानी परिवेदनाओं के आधार पर ही सूची जारी की जा रही हैं।