Rajasthan Weather Update : मानसून ब्रेक के बीच रक्षाबंधन पर्व पर अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। राजधानी जयपुर में बुधवार शाम को झमाझम बारिश हुई। इससे उमस और गर्मी से राहत मिली। बारिश से मौसम खुशनुमा हो गया।
Rajasthan weather update : जयपुर। मानसून ब्रेक के बीच रक्षाबंधन पर्व पर अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। राजधानी जयपुर में बुधवार शाम को झमाझम बारिश हुई। इससे उमस और गर्मी से राहत मिली। बारिश से मौसम खुशनुमा हो गया। बारिश का यह दौर करीब आधा घंटे तक चला। तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। लोग इस बारिश का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। दरअसल, जयपुर में दोपहर बाद आसमान में बादल छा गए और हवा चलने लगी। कुछ देर बाद शहर के कई इलाकों में बारिश हुई। इससे पहले मौसम विभाग ने जयपुर समेत कुछ जिलों में बारिश की संभावना जताई थी। जिससे बाद जयपुर में बारिश हुई।
हालांकि मौसम केंद्र जयपुर ने पूर्वानुमान जारी कर राजस्थान में कमजोर मानसून परिस्थितियां आगामी एक सप्ताह के दौरान जारी रहने की प्रबल संभावना जताई है। इस दौरान अधिकांश भागों में मौसम शुष्क रहेगा। वहीं अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे किसान अब मायूस होते हुए नजर आ रहे हैं। बारिश नहीं होने से खरीफ फसल में संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में किसान काफी चिंतित है।
राजस्थान के 33 में से 15 जिलों में औसत से कम बारिश
मौसम विभाग वर्तमान में प्रदेश में 33 जिले ही मानता है। मंगलवार तक के डाटा के अनुसार 33 में से 15 जिलों में औसत से कम बारिश हुई है। इसमें 13 जिले पूर्वी राजस्थान के है। पश्चिमी राजस्थान में केवल चूरू और हनुमानगढ़ में ही औसत से कम बारिश रिकॉर्ड हुई है।
खराब होती फसल देख सदमे से किसान की मौत
बूंदी जिले के रायथल थाना क्षेत्र के कोड़िजा गांव में पानी के अभाव में खराब होती मक्का की फसल को देख सदमे से एक किसान की मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। मृतक के पुत्र की रिपोर्ट पर पुलिस ने जांच शुरू की है।
अल-नीनो के साथ दो और प्रणालियां सक्रिय
मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र का कहना है कि अगस्त में सामान्य से कम बारिश का मुख्य कारण अल-नीनो है। दूसरा कारण दक्षिण चीन सागर में कम दबाव वाली प्रणालियों की कम संख्या भी है। मौजूदा अल नीनो स्थितियों के प्रभाव में बंगाल की खाड़ी पर सामान्य पांच के मुकाबले केवल दो कम दबाव वाली प्रणालियां बनी हैं। इसके साथ ही ‘मैडेन जूलियन ऑसिलेशन’ (एमजेओ) का प्रतिकूल चरण भी देखा जा रहा है। यह एक समुद्री-वायुमंडलीय घटना है, जो मौसम की गतिविधियों को प्रभावित करती है।