Raksha Bandhan: तीज त्योहार पर भले ही आधुनिकता का रंग चढ़ता जा रहा हो, पर आज भी राजधानी में कुछ परिवार सूण (श्रवन) पूजन की परपम्परा को साकार कर रहे है।
जयपुर। तीज त्योहार पर भले ही आधुनिकता का रंग चढ़ता जा रहा हो, पर आज भी राजधानी में कुछ परिवार सूण (श्रवन) पूजन की परपम्परा को साकार कर रहे है। इस बार भी रक्षाबंधन पर सूण पूजन की परंपरा निभाई जा रही है। महिलाएं घरों के बाहर श्रवण पूजन करेंगी और उसके बाद ही भाइयों की कलाई पर राखी बांधेगी। हालांकि रसोई घर की जगह अब श्रवण मुख्य द्वार (दरवाजे) पर आ गए है। घर के दरवाजे पर श्रवण बनाकर उनका पूजन किया जाएगा।
रक्षा बंधन से पहले महिलाएं घर के दरवाज पर सूण बनाएंगी, इसके बाद उनका पूजन कर मिठाई का भोग अर्पित किया जाएगा और सूण के डोरा बांधा जाएगा। इसके बाद ही भाइयों की कलाई पर राखी बांधी जाएगी। शेखावाटी से शुरू हुई यह परंपरा अब जयपुर में भी निभाई जा रही है। अब नौकरीपेशा महिलाएं भी रक्षाबंधन पर सून जिमा रही है। हालांकि समय के साथ जरूर इसमें बदलाव देखने को मिला और रसोई की परपम्परा मुख्य द्वार तक आ गई। शेखावाटी में जहां रसाई घर में सूण बनाकर उसका पूजन किया जाता है, वहीं जयपुर में दरवाजों पर सूण बनाकर उसे पूजा जाने लगा है।
ज्योतिषाचार्य का मत
अंक ज्योतिषाचार्य पुष्पा जोशी कहती है कि श्रावण मास श्रवण कुमार को समर्पित है। श्रवणजी का नाम अपभ्रंस होते होते सूण बन गया। श्रवण जिमाने की परंपरा पहले रसोई घर से शुरू हुई थी। राजस्थान में शेखावाटी में कई घरों में आज भी रसोई घर में सूण और सूरज बनाकर जिमाते है। वहीं मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाकर उसे पूजा जाता है। श्रवण को भाई व पुत्र का प्रतीक मानते है, इसलिए सबसे पहले श्रवण को रक्षा सूत्र बांधते है।
घर को खराब ऊर्जा से बचाते
समाजसेविका सुलभा सारडा कहती है कि रक्षा बंधन पर सूण जिमाने की परंपरा रही है। सूण हमारे घर को खराब ऊर्जा से बचाते है और अच्छी शक्तियों का स्वागत करते है। पहले हम गोबर या गेरू का उपयोग करते थे, अब बाजार में बने—बनाए सूण मिल जाते है।
भक्ति व त्याग को दिलाता याद
सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रियंका यादव कहती है कि रक्षाबंधन के दिन सूण जिमाते है, यह सूण श्रवण कुमार ही है। श्रवण कुमार के माता—पिता के प्रति भक्ति व त्याग को याद करने के लिए श्रवण जिमाने की परंपरा शुरू हुई। आज भी रक्षाबंधन के दिन श्रवण जिमाते है।
सौभाग्य व समृद्धि का प्रतीक
जयपुर मेट्रो स्टेशन कंट्रोलर मीना सोनी कहती है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान के पूजन से होती है। रक्षाबंधन पर भी भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले हम श्रवण को धागा अर्पण करते है। रक्षा बंधन पर सूण की पूजा करना भी सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है।
पंचांगों में भी देने लगे मुहूर्त
सूण जीमाने की परंपरा के प्रति लोगों की आस्था को देखते हुए अब पंचांग निर्माता भी अपने पंचांगों में सूण पूजन का मुहूर्त देने लगे है। ज्योतिषाचार्य डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि मंगलवार को भद्रा नहीं है, अत: आज सम्पूर्ण दिन सूण मांड सकते हैं। 30 अगस्त को सुबह 10:58 से रात 9:02 बजे तक पृथ्वीलोक (नैर्ऋत्य कोण की अशुभ भद्रा) की भद्रा रहेगी, अत: सुबह 10:58 बजे से पहले ही सूण जिमा लेने चाहिए।