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Hanuman Beniwal: हनुमान बेनीवाल भैराणा धाम पहुंचे, भजनलाल सरकार पर साधा निशाना, जयपुर कूच की चेतावनी

Bhairana Dham: जयपुर में भैराणा धाम को बचाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन 42वें दिन भी जारी रहा और संतों का धरना लगातार तेज होता जा रहा है।

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Hanuman Beniwal

महापंचायत को संबोधित करते हनुमान बेनीवाल। फोटो- पत्रिका

जयपुर। दादू पालकां भैराणा धाम को बचाने की मांग को लेकर चल रहा ‘रीको भगाओ-भैराणा धाम बचाओ’ आंदोलन अब लगातार बड़ा रूप लेता जा रहा है। आंदोलन के तहत साधु-संतों और अनुयायियों का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को 42वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान संत महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान सहित कई राज्यों से संत-महात्मा, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में सर्वसमाज के लोग शामिल हुए। भीषण गर्मी और तपती दोपहरी के बावजूद संत समाज धाम की पवित्रता और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा के लिए धरने पर डटा हुआ है।

महापंचायत में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल भी पहुंचे। उन्होंने राज्य सरकार और रीको प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह केवल जमीन का विवाद नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और ग्रामीण अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि वे विकास और उद्योगों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन रीको ने संतों की तपोस्थली और धार्मिक आस्था से जुड़ी भूमि को गलत तरीके से औद्योगिक क्षेत्र के लिए चिन्हित किया है। इससे संत समाज और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

सरकार को चेतावनी

बेनीवाल ने सरकार को दो-टूक चेतावनी देते हुए कहा कि अगर धाम की जमीन से रिको का प्रोजेक्ट नहीं हटाया गया, तो हजारों लोग जयपुर की ओर कूच करेंगे। उन्होंने कहा, सीधी अंगुली से घी नहीं निकलता तो अंगुली टेढ़ी करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि अब सरकार से आर-पार की लड़ाई होगी। बेनीवाल ने कहा कि साधुओं से जो भी टकराया, उसका अस्तित्व खत्म हो गया। बेनीवाल ने कहा कि यदि संत समाज अपनी मांगों पर अडिग रहा तो रीको को यहां से हटना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से संतों की भावनाओं का सम्मान करते हुए जल्द समाधान निकालने की अपील की।

'किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा'

सांसद ने कहा कि किसी भी कीमत पर धार्मिक और पौराणिक महत्व वाले स्थान की पहचान खत्म नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को विकास कार्यों के साथ लोगों की आस्था का भी सम्मान करना चाहिए। संघर्ष समिति के अनुसार शासन, प्रशासन और रीको अधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। संत समाज ने स्पष्ट किया है कि भैराणा धाम की धार्मिक और पौराणिक पहचान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो जयपुर कूच किया जाएगा। संत समाज का कहना है कि भैराणा धाम लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र और हजारों संतों की तपोभूमि है। ऐसे में इस भूमि को औद्योगिक क्षेत्र में शामिल करने का विरोध लगातार जारी रहेगा।