
फाइल फोटो- पत्रिका
पश्चिमी राजस्थान से. एयरफोर्स स्टेशन का नया रन-वे पूरी तरह तैयार हो गया है। इसके साथ ही करीब 70 दिन से अन्य एयरबेस पर संचालित की जा रही सुखोई-30 एमकेआई की 31वीं स्क्वाड्रन अब वापस लौटने की तैयारी में है। रन-वे के पुनर्निर्माण के दौरान लड़ाकू विमानों को पश्चिमी सीमा के समीप स्थित अन्य एयरफोर्स स्टेशनों पर स्थानांतरित किया गया था। एयरफोर्स स्टेशन के रन-वे की अंतिम री-कारपेटिंग वर्ष 2007 में हुई थी। लगभग दो दशक बाद इसका व्यापक नवीनीकरण किया गया है।
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निर्माण कार्य 10 मार्च से शुरू होकर तीन चरणों में पूरा हुआ। पहले चरण में 10 से 28 मार्च तक एक छोर का निर्माण किया गया। इसके बाद 29 मार्च से 27 अप्रेल तक मध्य हिस्से पर काम चला, जिसके कारण सिविल उड़ानें भी एक माह तक प्रभावित रही और एयरपोर्ट बंद रखना पड़ा। मध्य भाग तैयार होने के बाद 28 अप्रेल से सिविल उड़ानों का संचालन फिर शुरू कर दिया गया। अंतिम चरण में दूसरे छोर का निर्माण हुआ, जो 20 मई को पूरा कर लिया गया। नए रनवे का पीसीएन (पेवमेंट क्लासिफिकेशन नंबर) 40 प्लस रखा गया है, जिससे भारी विमान भी सुरक्षित लैंडिंग कर सकेंगे।
एयरफोर्स स्टेशन पर सुखोई-30 एमकेआई की 31वीं स्क्वाड्रन तैनात है, जिसे 'द लायंस' के नाम से जाना जाता है। एक स्क्वाड्रन में सामान्यतः 16 से 18 लड़ाकू विमान शामिल होते हैं। सुखोई जैसे भारी और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के सुरक्षित संचालन के लिए उच्च क्षमता वाले लंबे रन-वे की आवश्यकता होती है। निर्माण कार्य के दौरान स्क्वाड्रन की नियमित उड़ान गतिविधियां अन्य एयरबेस से संचालित की गईं।
Published on:
25 May 2026 06:00 am
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