आज प्रदोष व्रत है जिसमें सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं और प्रदोष काल में शिव पूजा के पश्चात् व्रत का पारण करते हैं। शाम को सूर्यास्त से आसपास का करीब एक घंटा का समय प्रदोष काल माना जाता है। इस दिन माता पार्वती, गणेशजी, कार्त्तिकेयजी और नंदी की पूजा भी अनिवार्य होती है। इस दौरान मन्त्रों के साथ शिव परिवार की पूजा—अर्चना करते हैं।

जयपुर. आज प्रदोष व्रत है जिसमें सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं और प्रदोष काल में शिव पूजा के पश्चात् व्रत का पारण करते हैं। शाम को सूर्यास्त से आसपास का करीब एक घंटा का समय प्रदोष काल माना जाता है। इस दिन माता पार्वती, गणेशजी, कार्त्तिकेयजी और नंदी की पूजा भी अनिवार्य होती है। इस दौरान मन्त्रों के साथ शिव परिवार की पूजा—अर्चना करते हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि शिव पूजा के लिए प्रदोष व्रत अत्यंत शुभ मुहूर्त्त होता है। इस दिन पूर्ण विश्वास और भक्तिपूर्वक शिवपूजा करने से दुख—दर्द कम होते हैं और सुख प्राप्त होता है। इस दिन शिवलिंग पर सफेद फूलों की माला अर्पित करेें, शिवाभिषेक करें और धतूरा, भांग चढ़ाएं। शिव चालीसा या शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी करें।
ज्योतिषाचार्य पंडित जीके मिश्र के मुताबिक शिवलिंग को जल से स्नान कराएं और बेलपत्र चढ़ाएं। पूजा के दौरान घी का दीप जरूर जलाएं। इससे वातावरण की शुद्धि भी होती है। प्रदोष व्रत में पूजा के समय ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। पूजा संपन्न होने के बाद किसी जरूरतमंद को कुछ न कुछ दान जरूर दें।
इस दिन कलश में जल भरकर आम के पत्तों के साथ स्थापित कर भगवान् शिव के रूप में इसकी पूजा की जाती है। जिस कलश में जल भरकर रखते हैं उसे दूर्वा से ढँक कर कमल बनाया जाता है। इसके पश्चात् पूजा विधि में उपयोग हुए जल को पवित्र राख के साथ प्रसाद के रूप में दिया जाता है। इस राख को माथे पर लगाया जाता है।
प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
प्रदोष व्रत- त्रयोदशी तिथि 27 दिसंबर 2020 शनिवार
सुबह की पूजा का मुहूर्त- 27 दिसंबर सुबह 5. 21 बजे से सुबह 6. 54 बजे तक।
शाम की पूजा का मुहूर्त- 27 दिसंबर शाम 5.33 बजे से शाम 6. 54 बजे तक।