देश की प्रमुख उत्पादक मंडियों में इन दिनों लालमिर्च की आवक कमजोर होने से इसके दामों में जोरदार तेजी देखी जा रही है। हालात यह है पिछले साल के मुकाबले इस साल लालमिर्च के दाम दोगुने से ज्यादा बोले जा रहे है।
देश की प्रमुख उत्पादक मंडियों में इन दिनों लालमिर्च की आवक कमजोर होने से इसके दामों में जोरदार तेजी देखी जा रही है। हालात यह है पिछले साल के मुकाबले इस साल लालमिर्च के दाम दोगुने से ज्यादा बोले जा रहे है। पिछले साल लालमिर्च के औसतन दाम 110 से 190 रुपए प्रति किलो थे, जो इस साल बढ़कर 210 से 325 रुपए किलो तक पहुंच गए है। नई फसल नवंबर मध्य तक दक्षिण भारत से आने की उम्मीद है। मसाला व्यापारी रामअवतार अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में एमपी से लालमिर्च की आवक हो रही है, लेकिन सितंबर और अक्टूबर में भी बारिश का दौर बना होने से फसल को जबरदस्त नुकसान हुआ है। यहां 40 फीसदी फसल खराब हो चुकी है और जो बची हुई फसल है वो भी लेट हो गई है, जिसके कारण मंडियों में इसके दाम एक बार फिर लाल हो गए है।
गुंटूर में होता है मिर्च का सबसे ज्यादा उत्पादन
बता दें कि मिर्च का सबसे ज्यादा उत्पादन देश में आंध्रप्रदेश के गुंटूर जिले में होता है। यहां पूरे राज्य की 30 से 40 प्रतिशत मिर्च पैदा होती हैए लेकिन इस बार यहां भी मिर्च का उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसके अलावा तेलंगाना में भी मिर्च की खेती अधिक होती है वहां भी इस फसल में रोग का प्रकोप होने से पैदावार कम हुई है। कुल मिलाकर मिर्च की पैदावार घटने से इसके बाजार भावों में भारी उछाल आ रहा है। इसका लाभ किसान उठा सकते हैं। वहीं व्यापारियों को अभी और तेजी आने की उम्मीद बनी हुई है जिससे वे मिर्च का स्टॉक कर रहे हैं।
घरेलू मांग बढ़ने से और बढ़ेंगी कीमतें
जैसे.जैसे मिर्च की घरेलू मांग बढ़ेगी तो इसकी कीमतों में भी उछाल आता जाएगा। इन दिनों उन किसानों को मिर्च की कम पैदावार के बाद भी खासा लाभ मिल सकता हैए जिन्होंने इसकी खेती की है। किसानों के अलावा व्यापारी भी मिर्च का स्टॉक करने में जुट गए हैं। चूंकि अभी मिर्च की नई फसल आने में काफी देरी हैए इसलिए किसानों को चाहिए कि वे उचित समय देख कर मिर्च का बेचान करना शुरू कर दें।