
जयपुर। गुजरात विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत से जहां भाजपा उत्साहित है वहीं गुजरात से सटे राजस्थान में हुए उपचुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी को मिली करारी हार पर अब प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने प्रदेश नेतृत्व से हार के कारणों की रिपोर्ट मांगी है।
चुनाव में मिली करारी हार पर प्रदेश स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी मंथन हुआ है और हार के कारणों का पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं। हार को लेकर केंद्रीय नेताओं ने भी इस मामले में नाराजगी जाहिर की है, साथ ही प्रदेश नेतृत्व और प्रदेश प्रभारी को निर्देश भी दिए गए थे कि वहीं हार के कारणों के साथ-साथ ग्राउंड रियलिटी के साथ-साथ बूथवाइज की रिपोर्ट बनाकर भी भेजें जिसके बाद प्रदेश प्रभारी अरुण अरुण सिंह ने प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट बनाने के निर्देश दिए थे।
विधानसभा चुनाव से पहले उपचुनाव में हार
दरअसल पार्टी नेताओं की परेशानी यह है कि विधानसभा चुनाव में 1 साल का समय बचा है और उससे पहले सरदारशहर उपचुनाव में मिली करारी हार से संदेश अच्छा नहीं गया है, कार्यकर्ताओं और नेताओं के मनोबल में भी कमी आती है। हालांकि पार्टी नेताओं का यह भी कहना है कि विधानसभा चुनाव में चुनावी तस्वीर अलग होगी और वहां पर पार्टी का बंपर सीटें मिलेंगी।
पूनियां-राठौड़ की साख को धक्का
इधर सरदारशहर उपचुनाव में उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनियां की साख को धक्का लगा है। दरअसल राजेंद्र राठौड़ और सतीश-पूनिया दोनों चूरू जिले से ही आते हैं, राजेंद्र राठौड़ जहां चूरू से विधायक हैं तो वहीं सतीश पूनियां चूरू के राजगढ़ कस्बे से आते हैं और लंबे समय तक चूरू की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
बताया जाता है कि भाजपा प्रत्याशी अशोक कुमार पिंचा को प्रत्याशी बनाए जाने में दोनों ही नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका थी। ऐसे में सरदारशहर उपचुनाव में पार्टी को जीत मिल सके इसके लिए दोनों ही नेताओं कंधों पर जिम्मेदारी थी लेकिन अब सरदारशहर उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद सतीश पूनिया और राजेंद्र राठौड़ की साख को भी धक्का लगा है, इसके अलावा चूरु सांसद राहुल कस्वां भी उपचुनाव में कोई खास असर नहीं छोड़ पाए।
पार्टी में गुटबाजी हावी
वहीं दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि भाजपा में गुटबाजी नहीं है और सब कुछ एकजुट हैं लेकिन अंदर खाने गुटबाजी अभी भी हावी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की जयपुर में हुई रैली के दौरान भी गुटबाजी देखने को मिली थी, जहां पर एक गुट के नेताओं ने रैली से दूरी बनाई हुई थी तो वहीं उपचुनाव के दौरान भी पार्टी के एक धड़े ने उपचुनाव से दूरी बनाई हुई थी। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एक बार भी उपचुनाव में प्रचार के लिए नहीं पहुंची थी जबकि उनका नाम स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल था। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी में फैली गुटबाजी भी शीर्ष नेतृत्व के लिए सिरदर्द बनी हुई है।
कांग्रेस ने चला था सहानुभूति कार्ड
सरदारशहर उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी ने सहानुभूति कार्ड चलते हुए दिवंगत विधायक भंवरलाल शर्मा के पुत्र अनिल शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा था, जहां पर स्थानीय मतदाताओं ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया कांग्रेस पार्टी को जीत हासिल हुई। गौरतलब है कि बीते 4 साल में अब तक 8 उपचुनाव हुए हैं जिनमें 6 उपचुनाव कांग्रेस पार्टी ने जीते हैं जबकि एक उपचुनाव बीजेपी ने जीता है और एक उपचुनाव राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने जीता है।
सुजानगढ़, सहाड़ा, वल्लभनगर, धरियावद, मंडावा और सरदार शहर में कांग्रेस पार्टी को जीत मिली तो वहीं राजसमंद में भाजपा की जीत हुई और खींवसर में लोकतांत्रिक पार्टी की जीत हुई थी हालांकि गठबंधन के चलते खींवसर उपचुनाव में भाजपा ने रालोपा प्रत्याशी के सामने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था।
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