
Rajasthan Politics : कांग्रेस-भाजपा। फाइल फोटो पत्रिका
राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय और पंचायती राज चुनावों का बिगुल बजने से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने चुनावी रोडमैप तैयार कर मैदान में उतरने की रणनीति तेज कर दी है। जयपुर स्थित दोनों पार्टियों के प्रदेश मुख्यालयों में सोमवार को मैराथन बैठकों का दौर चला, जिसमें बूथ स्तर से लेकर वार्ड प्रत्याशियों के चयन के लिए कड़े नियम और दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।
जहां एक ओर सत्तारूढ़ भाजपा ने सिफारिशी कल्चर को नकारते हुए 'केवल जिताऊ प्रत्याशी' और जेन-जी युवाओं को प्राथमिकता देने का ऐलान किया है, वहीं विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने वार्ड स्तर पर बाहरी प्रत्याशियों की नो-एंट्री करते हुए 'जिस वार्ड का वोटर, वहीं से टिकट' की शर्त को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है।
इन नए दिशा-निर्देशों के सामने आने के बाद प्रदेश भर के 309 नगरीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हजारों कार्यकर्ताओं, युवा दावेदारों और पूर्व जनप्रतिनिधियों के बीच चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
प्रदेश भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में निकाय चुनाव के लिए पार्टी का मुख्य नैरेटिव तय किया गया। इस बैठक में प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल, प्रदेश संगठन महामंत्री अजय कुमार और निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी सहित कई राष्ट्रीय पदाधिकारी मौजूद रहे।
भाजपा ने स्पष्ट किया है कि प्रत्याशी चयन में किसी भी प्रकार का भाई-भतीजावाद, दबाव या पारिवारिक सिफारिश काम नहीं आएगी। केवल स्थानीय प्रभाव और चुनाव जीतने की क्षमता ही टिकट का एकमात्र पैमाना होगी।
जेन-जी और नए चेहरे: पार्टी पहली बार निकाय चुनावों में जेन-जी (18 से 25 वर्ष के युवा) के बीच से सक्रिय युवाओं को तलाशकर उन्हें सीधे चुनावी मैदान में उतारने की संभावनाओं पर काम कर रही है।
सरकार की उपलब्धियों का सहारा: चुनाव में सरकार के पिछले ढाई साल के कामकाज, विकास योजनाओं और कांग्रेस के कथित कुशासन व गुटबाजी को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा। इसके लिए आईटी, सोशल मीडिया और मीडिया की संयुक्त डिजिटल टीम तैनात की जा रही है।
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, एआईसीसी प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने 23 जिलों के जिलाध्यक्षों, विधायकों और सांसदों के साथ छह अलग-अलग चरणों में विस्तृत फीडबैक लिया।
डोटासरा ने कहा, 'जिलों में पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटियां गठित कर चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सरकार के ढाई साल के कार्यकाल की नाकामियों को लेकर हम जनता के बीच जाएंगे। निकाय चुनाव में युवाओं को 50 फीसदी टिकट देने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। इस बार केवल योग्य, सक्रिय और संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं को ही प्राथमिकता दी जाएगी।'
कांग्रेस पार्टी ने इस बार प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल और प्रशासनिक मापदंड तय किए हैं:
वार्ड की बाध्यता: दावेदार जिस वार्ड का पंजीकृत मतदाता होगा, वह केवल उसी वार्ड से चुनाव लड़ सकेगा। दूसरे वार्ड में जाकर चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ऑनलाइन और ऑफलाइन फॉर्म: चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ताओं को प्रदेश कांग्रेस के आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने के साथ-साथ ऑफलाइन फॉर्म भी जमा कराना होगा।
बायोडाटा की स्क्रीनिंग: आवेदन फॉर्म में कार्यकर्ताओं को यह बताना होगा कि वे कब से पार्टी में सक्रिय हैं, पूर्व में किन सांगठनिक पदों पर रहे हैं और इससे पहले लड़े गए चुनावों में उनकी जीत का क्या आधार और समीकरण रहा था।
दोनों ही दलों की इस आक्रामक तैयारी और सख्त गाइडलाइंस से यह साफ है कि राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव बेहद दिलचस्प और कड़े मुकाबले वाले होने जा रहे हैं।
Updated on:
18 Aug 2026 10:26 am
Published on:
18 Aug 2026 10:26 am
