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जयपुर. सुबह दरवाजे पर दस्तक होती है तो पार्षद के सामने शिकायतों की लंबी फेहरिस्त होती है। कोई कहता है, 'गली में गड्ढे हैं, कभी भी हादसा हो सकता है।' दूसरा सीवर उफनने की शिकायत करता है तो तीसरा स्ट्रीट लाइट बंद होने से पसरे अंधेरे की। जनता के लिए ये सभी समस्याएं एक ही व्यक्ति से जुड़ी हैं, वह है पार्षद, लेकिन इनका समाधान अलग-अलग विभागों के जिम्मे है। ऐसे में पार्षद की असली परीक्षा सिर्फ समस्याएं सुनने में नहीं, बल्कि यह समझने में है कि कौन-सा काम किस विभाग से होगा, किस अधिकारी से बात करनी है और समाधान तक कैसे पहुंचना है। जो पार्षद इस प्रशासनिक तंत्र की समझ विकसित कर लेता है, वह जनता की उम्मीदों पर खरा उतरता है। जो ऐसा नहीं कर पाता, वह शिकायतों और विभागों के बीच उलझकर रह जाता है।
पेंशन: सामाजिक न्याय विभाग
राशन कार्ड: खाद्य विभाग
अस्पताल और टीकाकरण: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग
एक सड़क, तीन मालिक: एक ही सड़क का कुछ हिस्सा निकाय का, कुछ पीडब्ल्यूडी का, कुछ प्राधिकरण का हो सकता है। शिकायत से पहले संबंधित विभाग का रिकॉर्ड और नक्शा देख लें।
खुदाई किसने की, मरम्मत कौन करेगा: सड़क खोदने की अनुमति सीवर, पेयजल और बिजली विभाग लेते हैं। खुदाई से पहले ही यह तय करवा लें कि मरम्मत किसके खर्च पर होगी।
पार्षद का अधिकार क्या है: पार्षद का काम निगरानी, प्रस्ताव, बोर्ड बैठक में मुद्दा उठाना व विकास कार्यों की सिफारिश करना है।
पार्षद की गलती: कॉलोनी की स्थिति जाने बिना शिकायत भेज देना। अनुमोदित है या नियमन हुआ है, और हस्तांतरण हुआ या नहीं, इसी से तय होता है कि सड़क-नाली की जिम्मेदारी किसकी है।
Updated on:
04 Oct 2026 11:06 am
Published on:
04 Oct 2026 11:06 am
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