
जयपुर
प्रदेश में कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही कीटनाशकों को खत्म करने के लिए कारगर रिसर्च ने नतीजों पर राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों में परीक्षण किया जाएगा। एग्रोक्लीन फसल कवच और एग्रो चार्जर जैसी तकनीक से फसलों को रोगमुक्त करने का की कोशिश की जाएगी। कृषि मंत्री डॉ प्रभुलाल सैनी ने सोमवार को पंतकृषि भवन में आयोजित एक बैठक में इस बारे में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और कृषि अनुसंधान से जुड़े अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए।
दरअसल, कृषि मंत्री डॉ प्रभुलाल सैनी की अध्यक्षता में कृषि एवं उद्यानिकी से जुड़े विशेषज्ञों ने नैनो पार्टिकल्स संबंधी प्रजेंटेशन देखा। यह प्रजेंटेशन एग्रो चार्जर और एग्रो क्लीन बनाने वाली एक कंपनी के प्रतिनिधियों की ओर से दिया गया। पंत कृषि भवन में आयोजित इस प्रजेंटेशन के बाद कृषि मंत्री ने राज्य में पानी की कमी के साथ ही क्लाइमेंट चेंज के कारण बदलते मौसम और कीटों के प्रकोप पर कृषि विशेषज्ञों से चर्चा की। साथ कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को निर्देश दिए कि वे कंपनी के अनुंसधान कार्यों का अपने यहां परीक्षण करें। अगर कंपनी के दावे सकारात्मक साबित होते हैं तो इसे राज्य की कृषि में नया बदलाव संभव होगा। साथ ही किसानों की आमदनी दोगुना होने में भी यह मददगार होगा। कंपनी ने अपने प्रजेंटेशन में कम पानी में अधिक उत्पादन, कीटों के प्रकोप से मुक्ति के साथ ही फस
ल में डाली गई खाद के पर्याप्त उपयोग के संबंध में नैनो टेक्नोलॉजी का उपयोग करने संबंधी जानकारी दी।
कृषि लागत में कमी का दावा
अपने प्रजेंटेशन में कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस तकनीक के उपयोग से कीटनाशकों और उवर्रकों पर पर होने वाले खर्चे में कमी आएगी। मृदा का स्वास्थ्य सही रहेगा और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधरेगी। कंपनी के इस प्रजेंटेशन और प्रमाणिक जानकारी देखने के बाद कृषि मंत्री ने अनुसंधान के नतीजों का परीक्षण करने के लिए कहा। अगर उर्वरक और कीटनाशकों पर होने पर खर्च में कमी आती है। उत्पादन में बढ़ोतरी भी होती है। तो कृषि की लागत कम होने से किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।