जयपुर

RGHS Update : अब मानवाधिकार आयोग की एंट्री से खलबली! क्या ख़त्म होगा कैशलेस योजना में ‘कैश’ का अकाल?

राजस्थान में RGHS योजना के तहत इलाज और दवाइयों के लिए भटक रहे सरकारी कर्मचारियों की पीड़ा पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है।

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May 02, 2026
RGHS

राजस्थान की सबसे महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना RGHS (Rajasthan Govt Health Scheme) इन दिनों खुद 'आईसीयू' में नजर आ रही है। प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी, जो कल तक कैशलेस इलाज के भरोसे निश्चिंत थे, आज अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। इस संकट की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए इस पूरे मामले पर सुओ मोटो (Suo Motu) संज्ञान लिया है। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इलाज में देरी या उपचार से इनकार करना सीधे तौर पर 'मानवाधिकारों का उल्लंघन' है।

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'इलाज न मिलना मानवाधिकार का हनन'

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग

1 मई 2026 को जारी अपने आदेश में मानवाधिकार आयोग ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया, जिनमें बताया गया कि कैसे सरकारी कर्मचारियों को निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों से बैरंग लौटाया जा रहा है। आयोग ने अपनी टिप्पणी में कहा-

  • सेवाओं में व्यवधान: सरकारी कर्मचारियों को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं और दवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई RGHS योजना हाल के महीनों में गंभीर कार्यान्वयन मुद्दों का सामना कर रही है।
  • इलाज से इनकार: सूचीबद्ध अस्पतालों, केंद्रों और केमिस्टों ने लाभार्थियों को इलाज देने और दवाओं की आपूर्ति करने से कथित तौर पर इनकार कर दिया है।
  • मानवीय सरोकार: बीमारी के दौरान समय पर चिकित्सा देखभाल न मिलना किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

₹2,200 करोड़ ने बिगाड़ा खेल

ग्राफिक्स फोटो पत्रिका

इस पूरे गड़बड़झाले के पीछे जो सबसे बड़ी वजह सामने आई है, वह है सरकार पर बकाया भारी-भरकम राशि।

  • 9 महीने का इंतजार: सर्विस प्रोवाइडर्स (अस्पतालों और केमिस्टों) का पिछले 8 से 9 महीनों से भुगतान अटका हुआ है।
  • राशि का आंकड़ा: रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 2,200 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
  • अस्पतालों के हाथ खड़े: भुगतान न मिलने के कारण कई बड़े अस्पतालों ने खुद को योजना से अलग कर लिया है, जिससे मरीजों को अपनी जेब से भुगतान करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

कर्मचारियों में आक्रोश: 'प्रीमियम हमारा, फायदा किसका?'

​पत्रिका फाइल फोटो

राजस्थान के सरकारी कर्मचारी इस बात से नाराज हैं कि उनकी सैलरी से हर महीने RGHS के नाम पर कटौती की जाती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। जयपुर, जोधपुर और बीकानेर जैसे बड़े शहरों में कई पेंशनभोगियों को दवाइयों के लिए केमिस्टों से 'नो स्टॉक' या 'कैशलेस सुविधा बंद' के जवाब मिल रहे हैं।

सरकार से मांगा जवाब

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रदेश की भजनलाल सरकार इस 2,200 करोड़ रुपये के वित्तीय संकट का कोई त्वरित समाधान निकालेगी? मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब शासन सचिवालय में हलचल तेज हो गई है। आयोग ने इस देरी के पीछे के कारणों और व्यवस्था को सुचारु बनाने के रोडमैप पर सरकार से जवाब मांगा है।

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Published on:
02 May 2026 11:49 am
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