
जयपुर। राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं को पेपर लीक की आशंका से बचाने और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) डिजिटल तकनीक की ओर कदम बढ़ा रहा है। बोर्ड दिसंबर में होने वाली टीचिंग एसोसिएट भर्ती परीक्षा को पहली बार टैबलेट बेस्ड टेस्ट (TBT कम OMR) प्रणाली से कराने की तैयारी में है। इस प्रयोग के सफल रहने पर भविष्य में दूसरी भर्ती परीक्षाओं में भी टैबलेट के जरिए पेपर कराने का विकल्प खुल सकता है।
बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज के मुताबिक, नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारियां चल रही हैं। इसके लिए बोर्ड तीन बार डमी परीक्षा आयोजित कर चुका है। आईआईटी कानपुर की आईटी टीम ने भी परीक्षा प्रणाली का ट्रायल किया है। अब इस व्यवस्था की तकनीकी मजबूती और परीक्षा संचालन से जुड़ी तैयारियों को परखा जा रहा है। इस भर्ती में करीब 35 हजार अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। अभ्यर्थियों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने के कारण बोर्ड इसे नई तकनीक के परीक्षण के लिए उपयुक्त मान रहा है।
परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार, 17 नवंबर को राजस्थान सामान्य ज्ञान का पेपर आयोजित होगा, जबकि 7 दिसंबर से 21 दिसंबर तक विषयवार परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। बोर्ड की योजना है कि टैबलेट आधारित परीक्षा के जरिए प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखने और परीक्षा व्यवस्था में संभावित कमजोरियों को कम किया जाए।
परंपरागत परीक्षा व्यवस्था में प्रश्नपत्रों की छपाई, पैकिंग, सुरक्षित परिवहन और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के दौरान कई स्तरों पर गोपनीयता बनाए रखनी पड़ती है। इन प्रक्रियाओं में पेपर की सुरक्षा बड़ी चुनौती रहती है। टैबलेट आधारित परीक्षा में प्रश्नपत्रों के भौतिक प्रबंधन से जुड़े जोखिम कम किए जा सकते हैं। साथ ही, डिजिटल माध्यम से परीक्षा संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने की संभावना है।
इस व्यवस्था में टैबलेट पर प्रश्न देखने और ओएमआर आधारित उत्तर दर्ज करने की प्रक्रिया को शामिल किया जा सकता है। हालांकि, तकनीक अपनाने के साथ कुछ नई चुनौतियां भी सामने रहेंगी। डिवाइस की कार्यक्षमता, डिजिटल सुरक्षा, नेटवर्क संबंधी समस्याओं और परीक्षा के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम जरूरी होंगे।
टीचिंग एसोसिएट भर्ती परीक्षा का यह प्रयोग राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं के डिजिटल संचालन की दिशा में अहम कदम हो सकता है। हालांकि, व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि परीक्षा के दौरान तकनीकी दिक्कतों को किस तरह नियंत्रित किया जाता है और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर कैसे सुनिश्चित किए जाते हैं।