
विजय शर्मा / जयपुर. प्रदेशभर में यात्री वाहनों में पैनिक बटन और जीपीएस लगाने के आदेश जारी कर खुद परिवहन विभाग ही बैकफुट पर आ रहा है। एक जनवरी से ही योजना लागू करने के बाद 5 माह में भी इसकी क्रियान्विति नहीं हो पाई। ऐसे में विभाग पांच माह में तीन बार छूट की तिथि बढ़ा चुका है। वाहन चालकों को राहत देने के नाम पर और खुद की खामी छुपाने के लिए विभाग बार-बार यह बदलाव कर रहा है।
चार दिन शेष, अब फिर बढ़ेगी तारीख
जीपीएस सिस्टम को ट्रैकिंग करने के लिए कंट्रोल रूम नहीं बना पाने के कारण विभाग ने 28 फरवरी तक छूट दी थी। इसके बाद 31 मार्च और फिर अब 31 मई तक की छूट दे रखी है। ऐेसे में अब 31 मई के आदेशों में चार दिन शेष बचे हैं। मगर कंट्रोल रूम अभी तक नहीं बन पाया है और विभाग एक बार फिर आदेश में छूट देने की तैयारी कर रहा है।
महिलाओं से छेड़छाड़ व यौन उत्पीडऩ की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने यात्री वाहनों में रजिस्ट्रेशन के समय पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम की अनिवार्यता कर दी है। परिवहन विभाग ने राजस्थान में यह अनिवार्यता को 1 जनवरी से लागू कर दिया था।
अभी तक मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल रूम भी नहीं बना
पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम काम कैसे करेंगे, इसकी तैयारी अभी तक विभाग नहीं कर पाया है। वाहनों में सुरक्षा के लिहाज से लगने वाले पैनिक बटन और जीपीएस की मॉनिटरिंग अभी तक कंट्रोल रूम ही तैयार नहीं है।
क्या है यह योजना
-यह एक लाल रंग का बटन होगा
- बसों में 4 अलग-अलग जगह लगेगा
- पांच सीटर टैक्सी-कैब में ड्राइवर सीट के पीछे लगेगा
- खतरा महसूस होने पर कोई भी बटन दबा सकते हैं
- बटन दबाते ही मैसेज गगन सॉफ्टवेयर पर जाएगा
- यहां से पुलिस कंट्रोल रूम सूचना पहुंचेगी, यह वाहन सॉफ्टवेयर से जुड़ा होगा
- पैनिक बटन व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम से भी जुड़ा होगा
- वाहन सॉफ्टवेयर से सम्बंधित वाहन मालिक की पूरी सूचना निकल जाएगी
- सम्बंधित वाहन की लोकेशन भी पुलिस को मिल जाएगी
- नजदीकी थाना पुलिस कार्रवाई करेगी
अभी 31 मई तक के लिए ही आदेशों में छूट दे रखी है। सॉफ्टवेयर को लेकर तैयारी चल रही है। इसे जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। ताकि लोगों को इसका फायदा मिल सके।
राजेश यादव, आयुक्त परिवहन विभाग