जयपुर

Sachin Pilot : केरलम से लेकर असम तक, चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक रहे राजस्थान के सचिन पायलट, देखें तस्वीरें 

कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि सचिन पायलट उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिनकी डिमांड उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक एक समान है।

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Apr 04, 2026

राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट इन दिनों दिल्ली और जयपुर से ज्यादा केरलम और असम जैसे चुनावी राज्यों में डेरा डाले नजर आ रहे हैं। दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने उन्हें न केवल स्टार प्रचारक बनाया है, बल्कि केरलम जैसे महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी 'सीनियर ऑब्जर्वर' के तौर पर उनके कंधों पर डाल दी है।

पायलट की रैलियों में उमड़ रही भीड़ और युवाओं के बीच उनके क्रेज को देखते हुए यह माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजे पायलट की राष्ट्रीय राजनीति में प्रतिष्ठा और कद को एक नई ऊंचाई देंगे।

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असम की धरती पर राजस्थान का 'तेज'

पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर असम में सचिन पायलट की रैलियों में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ रहा है। पायलट अपने भाषणों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से जोड़कर भाजपा सरकार को घेर रहे हैं।

  • निशाने पर केंद्र: पायलट अपने चिर-परिचित शालीन लेकिन आक्रामक अंदाज में केंद्र सरकार की नीतियों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर प्रहार कर रहे हैं।
  • लोकप्रियता: असम के युवा मतदाताओं के बीच पायलट की 'क्लीन इमेज' और बेबाक भाषण शैली चर्चा का विषय बनी हुई है।

केरलम के 'संकटमोचक' और सीनियर ऑब्जर्वर

सचिन पायलट के लिए केरलम का चुनाव केवल प्रचार तक सीमित नहीं है। सीनियर ऑब्जर्वर होने के नाते वे वहाँ पार्टी की रणनीति, गुटबाजी को खत्म करने और प्रत्याशियों के चयन से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक की कमान संभाल रहे हैं।

  • रणनीति: पायलट केरल के हर जिले में रोड शो और छोटी बैठकें कर रहे हैं।
  • अपील: वे दक्षिण भारत के मतदाताओं को कांग्रेस के 'न्याय पत्र' और राहुल गांधी के विजन से जोड़ने का काम कर रहे हैं।

सबसे ज्यादा डिमांडिंग नेताओं में शामिल

कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि सचिन पायलट उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिनकी मांग उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक एक समान है।

असम में चुनाव प्रचार करते सचिन पायलट 
केरलम में चुनाव प्रचार करते सचिन पायलट
  • स्टार पावर: छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और अब केरलम-असम में पायलट के दौरे इस बात का सबूत हैं कि पार्टी उन्हें हिंदी बेल्ट के बाहर भी एक बड़े 'क्राउड पुलर' के रूप में देख रही है।
  • पायलट समर्थक: सोशल मीडिया पर भी पायलट के दौरों की तस्वीरें और वीडियो राजस्थान से ज्यादा दूसरे राज्यों के प्रशंसकों द्वारा शेयर किए जा रहे हैं।

दांव पर है प्रतिष्ठा !

राजस्थान के इस कद्दावर नेता के लिए यह चुनाव उनकी संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा भी है।

  • केरलम में प्रदर्शन: यदि केरल में कांग्रेस गठबंधन शानदार वापसी करता है, तो इसका सीधा श्रेय सचिन पायलट की रणनीति को जाएगा।
  • राष्ट्रीय कद: इन राज्यों के परिणाम तय करेंगे कि भविष्य में कांग्रेस के राष्ट्रीय ढांचे में पायलट की भूमिका कितनी बड़ी होगी।

राजस्थान का 'मान' और मरुधरा की उम्मीदें

राजस्थान के कार्यकर्ताओं के लिए यह गौरव की बात है कि उनके प्रदेश का एक नेता राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की दशा और दिशा तय कर रहा है। जयपुर से लेकर टोंक तक, पायलट समर्थक उनकी हर चुनावी रैली पर नजर रखे हुए हैं। वे इसे राजस्थान के 'भावी नेतृत्व' की वैश्विक और राष्ट्रीय स्वीकार्यता के रूप में देख रहे हैं।

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Updated on:
04 Apr 2026 12:55 pm
Published on:
04 Apr 2026 12:50 pm
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