कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि सचिन पायलट उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिनकी डिमांड उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक एक समान है।
राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट इन दिनों दिल्ली और जयपुर से ज्यादा केरलम और असम जैसे चुनावी राज्यों में डेरा डाले नजर आ रहे हैं। दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने उन्हें न केवल स्टार प्रचारक बनाया है, बल्कि केरलम जैसे महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी 'सीनियर ऑब्जर्वर' के तौर पर उनके कंधों पर डाल दी है।
पायलट की रैलियों में उमड़ रही भीड़ और युवाओं के बीच उनके क्रेज को देखते हुए यह माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजे पायलट की राष्ट्रीय राजनीति में प्रतिष्ठा और कद को एक नई ऊंचाई देंगे।
पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर असम में सचिन पायलट की रैलियों में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ रहा है। पायलट अपने भाषणों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से जोड़कर भाजपा सरकार को घेर रहे हैं।
सचिन पायलट के लिए केरलम का चुनाव केवल प्रचार तक सीमित नहीं है। सीनियर ऑब्जर्वर होने के नाते वे वहाँ पार्टी की रणनीति, गुटबाजी को खत्म करने और प्रत्याशियों के चयन से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक की कमान संभाल रहे हैं।
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि सचिन पायलट उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिनकी मांग उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक एक समान है।
राजस्थान के इस कद्दावर नेता के लिए यह चुनाव उनकी संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा भी है।
राजस्थान के कार्यकर्ताओं के लिए यह गौरव की बात है कि उनके प्रदेश का एक नेता राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की दशा और दिशा तय कर रहा है। जयपुर से लेकर टोंक तक, पायलट समर्थक उनकी हर चुनावी रैली पर नजर रखे हुए हैं। वे इसे राजस्थान के 'भावी नेतृत्व' की वैश्विक और राष्ट्रीय स्वीकार्यता के रूप में देख रहे हैं।