
CM Bhajanlal Sharma and Ex CM Ashok Gehlot - File PIC
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को अपनी विशेष सीरीज 'इंतज़ारशास्त्र' का 'चैप्टर-12' जारी किया। इस बार उनके निशाने पर जयपुर स्थित ड्रीम प्रोजेक्ट 'कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ़ राजस्थान' है, जिसे दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया की तर्ज पर बनाया गया था। गहलोत ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार की 'बदला लेने की राजनीति' के कारण प्रदेश के बुद्धिजीवियों, लेखकों और जनप्रतिनिधियों के लिए बना यह विश्वस्तरीय मंच आज बदहाली और नियमों की अनदेखी का शिकार है।
जयपुर के बीचों-बीच स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं है। गहलोत ने अपने पोस्ट में इस क्लब की सुविधाओं को याद दिलाते हुए सरकार को घेरा:
गहलोत ने सीधे तौर पर भजनलाल सरकार से तीन तीखे सवाल पूछे हैं:
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्लब जनता के खून-पसीने की कमाई और संसाधनों से बना है। इसे केवल इसलिए उपेक्षित रखना कि इसका निर्माण पिछली सरकार (कांग्रेस) के समय हुआ था, सरासर गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों की अनदेखी और सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग राजस्थान की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
गहलोत का तर्क है कि कांस्टीट्यूशन क्लब केवल एक इमारत नहीं, बल्कि राजस्थान की बौद्धिक विरासत का हिस्सा है। इसे बंद रखना या सीमित लोगों तक महदूद रखना प्रदेश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने जैसा है। इस मुद्दे ने अब जयपुर के राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ प्रदेश के साहित्यकारों और पत्रकारों के बीच भी बहस छेड़ दी है।
Updated on:
03 Apr 2026 11:38 am
Published on:
03 Apr 2026 11:38 am
