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Rajasthan Politics : अशोक गहलोत ने अब पूछे ये 3 तीखे सवाल, बोले- ‘जवाब दे भजनलाल सरकार’   

पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot की सोशल मीडिया सीरीज Intezar Shastra का कारवां शुक्रवार, 3 अप्रैल को अपने 12वें पड़ाव पर पहुँच गया है। इस बार गहलोत ने जयपुर के आलीशान Constitution Club of Rajasthan को मुद्दा बनाते हुए सरकार की नियत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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ashok gehlot bhajanlal sharma

ashok gehlot bhajanlal sharma

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को अपनी विशेष सीरीज 'इंतज़ारशास्त्र' का 'चैप्टर-12' जारी किया। इस बार उनके निशाने पर जयपुर स्थित ड्रीम प्रोजेक्ट 'कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ़ राजस्थान' है, जिसे दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया की तर्ज पर बनाया गया था। गहलोत ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार की 'बदला लेने की राजनीति' के कारण प्रदेश के बुद्धिजीवियों, लेखकों और जनप्रतिनिधियों के लिए बना यह विश्वस्तरीय मंच आज बदहाली और नियमों की अनदेखी का शिकार है।

विश्वस्तरीय सुविधाएं, पर उपयोग शून्य?

जयपुर के बीचों-बीच स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं है। गहलोत ने अपने पोस्ट में इस क्लब की सुविधाओं को याद दिलाते हुए सरकार को घेरा:

  • क्या-क्या है क्लब में: आधुनिक ऑडिटोरियम, मीटिंग हॉल, कॉफी शॉप, लग्जरी जिम, रेस्टोरेंट और वीआईपी गेस्ट रूम।
  • उद्देश्य: इसे बनाने का मकसद था कि राजस्थान के प्रबुद्ध नागरिक और जनप्रतिनिधि एक साझा मंच पर बैठकर स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद कर सकें।

पूछे तीन तीखे सवाल

गहलोत ने सीधे तौर पर भजनलाल सरकार से तीन तीखे सवाल पूछे हैं:

  1. देरी का कारण: निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न होने के बावजूद इसे लगभग एक साल तक बंद क्यों रखा गया?
  2. पारदर्शिता पर सवाल: अब जब इसे खोला गया है, तो सदस्यता (Membership) की प्रक्रिया को पारदर्शी और सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?
  3. डर का माहौल: क्या भाजपा सरकार को डर है कि इस क्लब में होने वाले लोकतांत्रिक संवाद और चर्चाओं से उनकी कमियां उजागर होंगी?

जनता के पैसे की बर्बादी का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्लब जनता के खून-पसीने की कमाई और संसाधनों से बना है। इसे केवल इसलिए उपेक्षित रखना कि इसका निर्माण पिछली सरकार (कांग्रेस) के समय हुआ था, सरासर गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों की अनदेखी और सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग राजस्थान की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।

राजस्थान की 'बौद्धिक विरासत' पर प्रहार

गहलोत का तर्क है कि कांस्टीट्यूशन क्लब केवल एक इमारत नहीं, बल्कि राजस्थान की बौद्धिक विरासत का हिस्सा है। इसे बंद रखना या सीमित लोगों तक महदूद रखना प्रदेश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने जैसा है। इस मुद्दे ने अब जयपुर के राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ प्रदेश के साहित्यकारों और पत्रकारों के बीच भी बहस छेड़ दी है।