
जयपुर. द्रव्यवती नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद अब सरकार एक्शन मोड में है। नगरीय विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक गुप्ता ने शुक्रवार को अधिकारियों के साथ चार घंटे तक नदी का निरीक्षण किया। सुबह 8:30 बजे बम्बाला पुलिया से शुरू हुआ दौरा दोपहर 12:30 बजे मजार डैम तक चला। करीब 40 किलोमीटर लंबे निरीक्षण में 20 से 25 ऐसे प्वॉइंट चिन्हित किए गए, जहां से सीधे सीवर और औद्योगिक इकाइयों का गंदा पानी नदी में गिर रहा है।
उन्होंने नगर निगम और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों को गंदगी रोकने के निर्देश दिए। सांगानेर, तारों की कूट, हसनपुरा और सुशीलपुरा क्षेत्र में नदी सबसे अधिक गंदी पाई गई। अधिकारियों को 5 दिन में व्यापक कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।
पहले भी हो चुके निरीक्षण
- 29 मार्च: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने द्रव्यवती नदी का दौरा कर गंदगी फैलाने वाली इकाइयों पर कार्रवाई और नोटिस देने के निर्देश दिए।
- सितंबर 2024: यूडीएच सचिव वैभव गालरिया ने निरीक्षण कर 45 दिन में सफाई के निर्देश दिए। कुछ दिन काम चला, लेकिन बाद में हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आए।
- जेडीए आयुक्त समय-समय पर दौरा कर दिशा-निर्देश देते रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की सक्रियता कुछ समय बाद कम हो जाती है।
समन्वय का अभाव
नदी किनारे जेडीए की पांच एसटीपी संचालित हो रही हैं, लेकिन इन्हें क्षमता के अनुरूप सीवरेज नहीं मिल पा रहा। सांगानेर औद्योगिक क्षेत्र का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। इसे रोकने के लिए जेडीए ने कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र लिखे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। नगर निगम की सीवरेज लाइन भी अक्सर ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सीधे नदी में गिराती है। सांगानेर क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों के लिए 12.3 एमएलडी क्षमता की सीईटीपी चालू है। इसमें 892 इकाइयों को जोड़ा जाना है, लेकिन अब तक केवल 758 इकाइयां ही जुड़ सकी हैं। बाकी का गंदा पानी सीधे नदी में जा रहा है।
Published on:
04 Apr 2026 12:10 pm
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