राजधानी आईजी ने राजगढ़ जिले से की शुरूआत
भोपाल। अपराध की दुनिया में आए नाबालिग बच्चों के बहके बचपन को बाल मित्र थाने में संवारा जाएगा, ताकि वह अपराधी न बनें। इस लिहाज से थाने में बाल मित्र पुलिस की शुरुआत कर दी गई है। इसके लिए एक लग्जरी क्लास रूम बनाया गया है, जो स्कूल के क्लास रूम जैसा दिखेगा। भटकी हुई जिंदगियों को ना सिर्फ नई राह मिल जाएगी बल्कि उनकी जिंदगी भी बर्बाद होने से बच जाएगी। प्रदेश में पहले बाल मित्र थाने की शुरूआत भोपाल के आईजी जयदीप प्रसाद ने राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ थाने से की है।
बाल मित्र पुलिस थाने में बच्चों के लिए जो रुम तैयार किया जा रहा है, वहां बच्चों के हिसाब से बैठने की व्यवस्था होगी। बाल मित्र थाने में रंग-बिरंगे पोस्टर, किताबें, कॉमिक्स, साफ पीने का पानी, अलग से शौचालय, आराम के लिए बिस्तर की व्यवस्था भी होगी। बच्चियों से बात करने के लिए महिला पुलिसकर्मी होंगी। थाने के बाल मित्र कोने या कमरे की निगरानी सीसीटीवी से की जाएगी ताकि बच्चों के साथ कैसा व्यवहार हो रहा है, उसका पता लग सके। डिस्पले बोर्ड पर बाल कल्याण और संरक्षण के अधिकारियों के नंबर, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के नंबर, बाल कल्याण समितियों के नंबर लिखे होंगे। कानूनी, मनोवैज्ञानिक और चिकित्सीय सुविधाएं भी बच्चों को मुहैया कराई जाएंगी। इसके साथ ही इस बात का विशेष ख्याल रखा जाएगा कि बच्चे, आरोपियों के संपर्क में नहीं आएं।
देश के हर जिले में बनाया जाएगा बाल मित्र थाना
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की पहल पर थाने के एक कोने को बच्चों के अनुकूल बनाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। यह एक मॉडल बाल मित्र थाना होगा जो एनसीपीसीआर की ओर से तैयार किए जा रहे राष्ट्रीय दिशा-निर्देश के मुताबिक है और आयोग का लक्ष्य है कि देश के हर जिले में एक बाल-मित्र थाना बनाया जाए।
काउंसलिंग के साथ होगी पढाई
बता दें कि इस बाल मित्र थाने में किताबें और खिलौने भी होंगे, ताकि काउंसलिंग के दौरान बच्चों को डर न लगे। इस क्लास में आपराधिक वारदातों में पकड़े गए नाबालिगों की काउंसलिंग भी की जाएगी। यहां सीसीटीवी कैमरा भी लगाया गया है। काउंसलिंग के लिए सादी वर्दी में दो पुलिसकर्मी और तीन चाइल्ड काउंसलिंग एक्सपर्ट्स मौजूद रहेंगे। बेसहारा और लापता बच्चों से लेकर भीख मांगने और पन्नी बीनने वाले बच्चों को भी यहां लाकर शिक्षा के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके लिए कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएगी।
एक बच्चे और बच्चे के संरक्षण तंत्र के बीच पुलिस पहली सपंर्क कड़ी होती है। इसलिए जरूरी है कि बच्चों के मन से पुलिस का भय दूर करना और उनसे दोस्ताना व्यवहार रखना। इससे भटकी हुई जिंदगियों को ना सिर्फ नई राह मिल जाएगी बल्कि उनकी जिंदगी भी बर्बाद होने से बच जाएगी।
- जयदीप प्रसाद, आईजी संभाग