पथरीली मिट्टी पर प्रयोग, एस्ट्रोनॉट्स भविष्य में चंद्रमा पर कर सकेंगे खेती दीर्घकालिक मानव शोध के लक्ष्यों के लिए महत्त्वपूर्ण
गेन्सविले. चांद पर इंसान का रहना आसान हो सकता है। अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों को चांद से लायी मिट्टी में पौधे उगाने में सफलता मिल गई है। चांद पर इंसानी बस्ती बसाने की कोशिश में जुटे वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जल्द ही चांद पर फसल उगाई जा सकेगी। वैज्ञानिक लंबे समय से चांद से लायी गई पथरीली मिट्टी में पौधे उगाने की कोशिशों में जुटे थे।
कम्यूनिकेशंस बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार अपोलो मिशंस के दौरान दो डिब्बों में चंद्रमा की सतह से मिट्टी लायी गई थी। इस मिट्टी में फूल वाले पौधे लगाए गए। मिट्टी को धरती का पानी और हवा मिल रही थी। बीज ने चंद्रमा की मिट्टी में पनपना शुरू कर दिया। नासा के प्रमुख बिल नेल्सन ने कहा, यह मानव शोध के लक्ष्यों के लिए महत्त्वपूर्ण है। भविष्य में हम अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खाद्य स्रोत विकसित करने के लिए चंद्रमा और मंगल ग्रह के संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे।
लगातार 11 साल तक किए प्रयोग
एना-लिसा पॉल और प्रोफेसर रॉबर्ट फर्ल ने बताया कि उन्हें चंद्रमा की 12 ग्राम मिट्टी मिली थी। मिट्टी पर 11 साल तक प्रयोग किए गए। इतनी कम मिट्टी में पौधे उगाना मुश्किल काम था, इसके बाद भी सफलता मिल गई। छह दिन बाद पौधे धीरे-धीरे बढ़ने लगे थे। बीस दिन बाद पौधों की डीएनए जांच में इन्हें सामान्य पौधों की तरह पाया गया।
अपोलो मिशन के दौरान लायी गई
यह मिट्टी अपोलो-11, 12 और 17 मिशन के दौरान लायी गई थी। यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा में प्रोफेसर एना-लिसा पॉल ने कहा कि चंद्रमा की मिट्टी में किसी तरह के पैथोजेन (ऐसे पदार्थ जो जमीनी जीवों और पौधों को नुकसान पहुंचाए) नहीं होते। पहले भी चांद की मिट्टी से पौधे उगाए गए हैं। पहले जो पौधे उगाए, उनमें चांद की मिट्टी सिर्फ छिड़की गई थी। इस बार चांद की मिट्टी में ही पौधे उगाए गए।