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Jagdeep Dhankar : 75 वर्ष के हुए पूर्व उपराष्ट्रपति, क्या जानते हैं इनके जीवन की ये 10 दिलचस्प और प्रेरक बातें?

देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के जीवन से जुड़ी 10 सबसे दिलचस्प और अनसुनी बातें। कैसे गांव के सरकारी स्कूल से निकलकर तय किया देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद तक का सफर। पढ़ें अनसुने किस्से।

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VP Jagdeep Dhankhar Interesting and Unknown Facts

VP Jagdeep Dhankhar Interesting and Unknown Facts

मरुधरा की माटी ने देश को कई राजनेता दिए हैं, लेकिन झुंझुनू के किठाना गांव में 18 मई 1951 को चौधरी गोकुलचंद और केसरी देवी के घर जन्मे जगदीप धनखड़ की कहानी सबसे जुदा है। एक किसान पुत्र का देश के सर्वोच्च पायदानों पर पहुँचना इस बात का गवाह है कि यदि प्रतिभा और लगन सच्ची हो, तो रास्ते की हर बाधा घुटने टेक देती है। आज हम आपको पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के जीवन से जुड़े ऐसे 10 अनछुए पहलू और बेहद रोचक किस्से बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

1. 5 किलोमीटर पैदल चलकर जाते थे स्कूल, पांचवीं तक नहीं सीखी थी 'एबीसीडी'

जगदीप धनखड़ की शुरुआती शिक्षा उनके गांव किठाना के सरकारी प्राइमरी स्कूल में हुई। पांचवीं कक्षा पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें रोजाना 4 से 5 किलोमीटर दूर घरधाना गांव के सरकारी मिडिल स्कूल में पैदल चलकर जाना पड़ता था। गांव के स्कूल में पांचवीं तक अंग्रेजी विषय नहीं था, जिसके कारण उन्हें शुरुआती दिनों में कड़ा संघर्ष करना पड़ा था।

2. प्रिंसिपल से बोले, "सर! मैं होशियार हूँ, बस अंग्रेजी नहीं आती"

जब उनका चयन चित्तौड़गढ़ के प्रतिष्ठित सैनिक स्कूल में हुआ, तो वहां पूरी पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में थी। एक बार क्लास में प्रिंसिपल ने उनसे अंग्रेजी में सवाल पूछा, तो वे समझ नहीं पाए। प्रिंसिपल ने उन्हें शाम को अपने बंगले पर चाय पर बुलाया। तब नन्हे जगदीप ने हिम्मत जुटाकर प्रिंसिपल से सीधे कहा- "सर, मैं पढ़ने में बहुत होशियार लड़का हूँ, बस मुझे अंग्रेजी नहीं आती।" प्रिंसिपल उनकी इस ईमानदारी और हिम्मत से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने खुद जगदीप को गाइड किया और उनकी अंग्रेजी सुधारी।

3. मां की चिंता और खाली पोस्टकार्ड का वो इमोशनल पैकेट

सैनिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान बेहद कम उम्र में घर से दूर रहने के कारण उनकी माता जी हमेशा चिंता में रहती थीं। धनखड़ ने खुद अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए बताया था कि जब भी वे छुट्टियों में घर जाते थे, तो उनकी मां उन्हें खाली पोस्टकार्ड का एक पूरा पैकेट थमा दिया करती थीं। मां का आदेश था कि हर दिन एक पोस्टकार्ड लिखकर गांव भेजना होगा ताकि उन्हें पता रहे कि उनका बेटा ठीक है।

4. टॉपर होने का 'वो डर' जिसने छीन ली थी बचपन की कई खुशियां

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने छात्रों को संबोधित करते हुए एक बार अपनी एक कमजोरी का भी खुलकर जिक्र किया था। उन्होंने बताया था— "मैं स्कूल और कॉलेज के दिनों में हमेशा क्लास में फर्स्ट आता था। लेकिन इस फर्स्ट आने के चक्कर में मैं हमेशा एक अनजाने डर में जीता था कि अगर किसी दिन फर्स्ट नहीं आया तो क्या होगा? उस डर की वजह से मैं बचपन में ज्यादा दोस्त नहीं बना पाया और कई हॉबीज भी छूट गईं।" वे बच्चों को सलाह देते हैं कि कभी भी अति-प्रतिस्पर्धा के जाल में न फंसें।

5. जब छोड़ दी IIT और एनडीए (NDA) जैसी बड़ी सीटें

सैनिक स्कूल से 12वीं पास करने के बाद जगदीप धनखड़ की कुशाग्र बुद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनका चयन देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली आईआईटी (IIT) प्रवेश परीक्षा में हुआ। इसके साथ ही उन्होंने एनडीए (NDA) की परीक्षा भी क्रैक कर ली थी। लेकिन देश के इन दो सबसे बड़े संस्थानों की सीटें मिलने के बाद भी वे वहां नहीं गए, क्योंकि वे कुछ अलग करना चाहते थे।

6. देश की सबसे बड़ी सिविल सर्विसेज (UPSC) परीक्षा भी की पास

आईआईटी छोड़ने के बाद उन्होंने जयपुर के महाराजा कॉलेज से फिजिक्स (B.Sc ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा भी पास कर ली थी। उनके पास एक शानदार प्रशासनिक अधिकारी (IAS/IPS) बनने का मौका था, लेकिन उन्होंने इसे भी छोड़कर राजस्थान विश्वविद्यालय से कानून (LLB) की पढ़ाई करने का फैसला किया।

7. विज्ञान छोड़ जब बने वकील: परिवार का वो 'पूर्वाग्रह' जिसने बदला रास्ता

जगदीप धनखड़ का रुझान भारतीय सेना में जाकर देश सेवा करने का था। लेकिन उनके परिवार के मन में फौज को लेकर कुछ पुराने पूर्वाग्रह और डर थे, जिसके कारण उनके माता-पिता उन्हें सेना में बड़े अफसर के रूप में नहीं देखना चाहते थे। परिवार की इसी इच्छा का मान रखते हुए उन्होंने सेना और विज्ञान का रास्ता छोड़कर वकालत के काले कोट को अपना करियर बनाया।

8. सलमान-शाहरुख और ललित मोदी तक के रहे वकील

1979 में बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद जगदीप धनखड़ ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे राजस्थान हाई कोर्ट और देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के सबसे महंगे और सीनियर मोस्ट वकीलों में शुमार हो गए। उन्होंने अपने कानूनी करियर में कई हाई-प्रोफाइल केस लड़े, जिनमें बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान (काले हिरण मामले के दौरान), शाहरुख खान और आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी जैसे दिग्गजों के केस शामिल हैं।

9. कभी राजीव गांधी के थे बेहद करीबी, फिर ऐसे बदले 'समीकरण'

राजनीति में आने के बाद जगदीप धनखड़ का सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। 1989 में वे झुंझुनू से जनता दल के टिकट पर सांसद बने और वीपी सिंह सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। इसके बाद 1991 में वे कांग्रेस में शामिल हो गए और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेहद करीबी नेताओं में गिने जाने लगे। वे 1993 से 1998 तक अजमेर के किशनगढ़ से कांग्रेस के विधायक भी रहे। साल 2003 में उन्होंने पाला बदला और भाजपा (BJP) का दामन थाम लिया, जहाँ वे पार्टी के लीगल सेल के सबसे बड़े सिपहसालार बने।

10. जब ला मार्टिनियर स्कूल के खिलाफ ही ठोक दिया था केस!

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहने के दौरान ममता बनर्जी सरकार से उनके तीखे विवाद तो जगजाहिर हैं, लेकिन उनके कानूनी तेवर का एक और बड़ा किस्सा कोलकाता के प्रसिद्ध 'ला मार्टिनियर स्कूल' से जुड़ा है। जब इस स्कूल ने अपने धार्मिक नियमों का हवाला देते हुए (कि बोर्ड मेंबर केवल ईसाई हो सकते हैं) उन्हें बोर्ड की सदस्यता देने से इनकार कर दिया, तो धनखड़ ने देश के संविधान में निहित 'समानता के अधिकार' का उपयोग करते हुए स्कूल प्रबंधन को कोर्ट में खींच लिया था और अपनी कानूनी समझ का लोहा मनवाया था।

मरुधरा के लाल की अमर गाथा

एक साधारण किसान के बेटे से लेकर देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चेयरमैन के पद तक का जगदीप धनखड़ जी का यह सफरनामा यह साबित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि आपके भीतर सीखने की ललक और आगे बढ़ने का हौसला है तो आप इतिहास रच सकते हैं। राजस्थान की धरती को अपने इस लाडले पर हमेशा नाज रहेगा।