
जयपुर पब्लिक ट्रांसपोर्ट। फाइल फोटो एएनआई
जयपुर। राजधानी जयपुर का दायरा पिछले पांच सालों में जितनी तेजी से बढ़ा है, उतनी ही तेजी से यहां के बाशिंदों की मुश्किलें भी बढ़ी हैं। जयपुर शहर की भीड़भाड़ और प्रदूषण से दूर सुकून की चाह में गए लाखों लोगों के लिए इन नए विकसित इलाकों में आलीशान सोसायटियां बन गईं, बिजली‑पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी पहुंच गईं, लेकिन जो नहीं पहुंचा, वह है पब्लिक ट्रांसपोर्ट। ऐसे में जयपुरवासियों को सफर में काफी परेशानी होती है।
बाहरी इलाकों से मुख्य शहर की दूरी भले ही 20 से 25 किलोमीटर हो, लेकिन परिवहन के पुख्ता साधन न होने से यह दूरी आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही है। स्थिति यह है कि इन इलाकों तक न तो जेसीटीएसएल की लो‑फ्लोर बसें पहुंच रही हैं और न ही मिनी बसें। मुख्य शहर जयपुर में नौकरी, बिजनेस या कॉलेज जाने के लिए लोगों को मजबूरन महंगे ऑटो या कैब का सहारा लेना पड़ता है। एक बार मुख्य शहर आने‑जाने में ही करीब 500 रुपए की चपत लग रही है।
किन क्षेत्र के लोगों को ज्यादा परेशानी: सिरसी रोड, अजमेर रोड, आगरा रोड, मांग्यावास, जामडोली, दिल्ली रोड
अगर बाहरी इलाकों में सिटी बसों या मेट्रो फीडर का सुचारू संचालन हो, तो एक आम आदमी का मासिक सफर मात्र 1,500 से 2,000 रुपए में पूरा हो सकता है। लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अभाव में निजी वाहनों के पेट्रोल और कैब के किराए पर हर महीने 10,000 से 12,000 रुपए खर्च हो रहे हैं। यानी सीधे तौर पर मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट पर 8 से 10 हजार रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। यही वजह है कि अब लोग प्रॉपर्टी खरीदते समय सिर्फ सुविधाएं नहीं, बल्कि मुख्य शहर से कनेक्टिविटी को पहली तवज्जो दे रहे हैं।
जयपुर में निजी वाहनों की संख्या आज 45 लाख के पार पहुंच चुकी है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के फेल का सीधा असर शहर के ट्रैफिक पर दिख रहा है। चूंकि बाहरी इलाकों के लोगों के पास कोई विकल्प नहीं है, इसलिए वे अपने निजी वाहनों (कार और बाइक) से शहर में प्रवेश करते हैं। यही कारण है कि ऑफिस समय के दौरान (सुबह 9 से 12 और शाम 5 से रात 8 बजे तक) टोंक रोड, अजमेर रोड और जेएलएन मार्ग जैसे प्रमुख मार्गों पर जाम लगता है। जो दूरी महज 30 मिनट में तय होनी चाहिए, उसमें एक से डेढ़ घंटा लग रहा है।
पांच साल पहले शांत माहौल देखकर मांग्यावास पर शिफ्ट हुआ था। घर के पास कोई बस स्टॉप नहीं है। रोजाना कार से अप‑डाउन करने में महीने का 11,000 रुपए का पेट्रोल जल रहा है। अगर सिटी बस होती तो यह खर्च 2,000 रुपए भी नहीं होता।
—-हरीश शर्मा, स्थानीय निवासी
मेरी बेटी टोंक रोड स्थित एक कॉलेज में पढ़ती है। जामडोली से मुख्य शहर के लिए कोई सीधी बस सेवा नहीं है। सुबह उसे छोड़ने के लिए या तो कैब करनी पड़ती है या खुद जाना पड़ता है। रोजाना 400 से 500 रुपए सिर्फ आने‑जाने में खर्च हो रहे हैं। पॉकेट मनी से ज्यादा तो ट्रांसपोर्ट का खर्च है।
-कमल सैनी, जामडोली
Updated on:
18 May 2026 08:15 am
Published on:
18 May 2026 08:15 am
