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Rajasthan New System: आज से इन अधिकारियों के लिए लागू होगा ‘पूल सिस्टम’, सरकारी दफ्तर के वाहनों का बचेगा ईंधन

Government Vehicle Sharing System: राजस्थान कृषि विभाग ने ईंधन बचत और सरकारी खर्च कम करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए ‘पूल सिस्टम’ लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले अधिकारी एक ही वाहन से दफ्तर आएंगे-जाएंगे।

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सरकारी दफ्तरों की प्रतीकात्मक तस्वीर: पत्रिका

Pool System In Agriculture Department: प्रधानमंत्री की ईंधन बचाने की अपील और मुख्यमंत्री के निर्देशों की पालना में कृषि विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग सोमवार से अधिकारियों के लिए ‘पूल सिस्टम’ लागू करने जा रहा है। इसके तहत सरकारी वाहनों का उपयोग करने वाले अधिकारी साझा वाहन व्यवस्था के माध्यम से दफ्तर पहुंचेंगे। विभाग का मानना है कि इससे सरकारी खर्च में कमी आने के साथ ईंधन की खपत भी कम होगी। अधिकारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए समय सारिणी भी तय की जाएगी, ताकि किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो।

दफ्तर से 10KM के दायरे वाले अधिकारियों का बनेगा ग्रुप

कृषि विभाग के आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि जिन अधिकारियों का निवास कार्यालय से 10 किलोमीटर के दायरे में है, उनका समूह बनाया जाएगा। एक ही वाहन में तीन से चार अधिकारी दफ्तर आएंगे-जाएंगे। इससे ईंधन की बचत के साथ वाहनों के अनावश्यक उपयोग पर भी रोक लगेगी। विभाग ने इसके लिए अधिकारियों की सूची तैयार कर ली है और रूट के अनुसार वाहनों का निर्धारण भी किया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार कई बार अलग-अलग अधिकारी एक ही समय पर एक ही कार्यालय के लिए अलग वाहनों से आते-जाते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस दोहराव को रोका जा सकेगा। विभाग का दावा है कि इससे प्रतिमाह हजारों लीटर डीजल और पेट्रोल की बचत होने की संभावना है। साथ ही वाहनों की मेंटेनेंस लागत और मरम्मत खर्च में भी कमी आएगी।

प्रशिक्षण और सेमिनार अब वीसी से

विभाग ने यात्रा खर्च और ईंधन खपत कम करने के लिए सेमिनार, बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए आयोजित करने का निर्णय लिया है। इससे अधिकारियों को बार-बार जिला या मुख्यालय स्तर पर यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। जरूरत पड़ने पर ही अधिकारियों को फील्ड विजिट के लिए भेजा जाएगा।

विभागीय अधिकारियों का मानना है कि नई व्यवस्था से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलेगी। इससे कार्यालयों में समय पर उपस्थिति भी सुनिश्चित हो सकेगी और वाहनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलेगी। कृषि विभाग की यह पहल अन्य विभागों के लिए भी मॉडल बन सकती है। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो भविष्य में अन्य सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों में भी इसे लागू किया जा सकता है।