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राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन का बड़ा फैसला, पंपों पर अब 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर तक डीजल मिलेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद राजस्थान में पेट्रोल-डीजल बिक्री पर नई सीमा लागू की गई है। अब पेट्रोल पंपों पर एक बार में अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल मिलेगा। तेल कंपनियों ने बढ़ती बिक्री और अवैध भंडारण की आशंका के चलते यह कदम उठाया है।

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जयपुर

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Arvind Rao

May 15, 2026

Rajasthan Fuel Limit News

Rajasthan Fuel Limit News (Patrika File Photo)

जयपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल-डीजल के उपयोग में संयम बरतने की अपील के बाद देश की तीनों तेल कंपनियों ने भी बिक्री पर 'सीलिंग' लागू करनी शुरू कर दी है। कंपनियों ने बिना किसी औपचारिक आदेश के राज्य भर के पेट्रोलियम डीलर्स को संदेश भेजकर पंपों पर अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल देने की सीमा तय कर दी है। राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के संरक्षक सुनीत बगई ने गुरुवार को तेल कंपनियों के समन्वयक एवं कार्यकारी निदेशक मनोज गुप्ता को पत्र भेजकर इसे मनमाना फैसला बताया।

वहीं, गुप्ता का कहना है कि पिछले दिनों पंपों पर बिक्री का डेटा हमने देखा तो पेट्रोल-डीजल की बिक्री अप्रत्याशित रूप से कई गुना बढी है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के अवैध भंडारण से इनकार नहीं किया जा सकता। पंप पर 50 लीटर तक पेट्रोल और 200 लीटर डीजल देने की यह आदर्श मात्रा है।

पेट्रोल-डीजल की बिक्री और नई पाबंदियों पर ताजा स्थिति

कार्यकारी निदेशक मनोज गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर कोई सामान्य लिमिट नहीं लगाई गई है। हालांकि, सप्लाई और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं।

गाड़ी की क्षमता के अनुसार ईंधन

अब पेट्रोल या डीजल केवल गाड़ी की टंकी की क्षमता के हिसाब से ही दिया जा रहा है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी कार की टंकी 50 लीटर की है, तो आपको पूरा 50 लीटर तेल मिलेगा। बोतल या डिब्बों में 'लूज' (खुला) पेट्रोल बेचने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।

डीजल की बिक्री पर चिंता

ड्रम या बैरल में डीजल देने पर भी रोक लगाई जा रही है। इससे किसान, सरकारी विभाग और सड़क निर्माण कंपनियां प्रभावित हो रही हैं, जो अपनी जरूरतों के लिए थोक में डीजल ले जाते थे।

डीलर्स की क्या है चुनौतियां और मांगें

सीमित सप्लाई और खुले तेल पर रोक के कारण ग्राहकों और पंप कर्मचारियों के बीच विवाद की आशंका है। डीलर्स का कहना है कि किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी तेल कंपनियों की होगी।

पेट्रोल पंप 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के दायरे में आते हैं, जिसके तहत स्टॉक बनाए रखना अनिवार्य है। डिपो से कम सप्लाई मिलने के कारण पंप 'ड्राई' (खाली) हो रहे हैं, जिससे संचालकों पर कानूनी कार्रवाई का तलवार लटक रही है।

अभी तक इन पाबंदियों पर कोई लिखित गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। डीलर्स संगठन ने मांग की है कि कंपनियां स्पष्ट लिखित आदेश दें और जनता को इसके बारे में जागरूक करें ताकि भ्रम की स्थिति न बने।