
Rakhi Hajela
एशिया सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक देश की 20 सशक्त महिलाओं की सूची में बीकानेर की सरिता राठौर को भी शामिल किया गया है। राठौर महिला उत्थान पर काम करने के साथ ही लेखन भी करती हैं। इससे पूर्व उन्हें समाज रत्न, बदलाव की नायक, लेडी ऑफ स्टील आदि की उपाधि भी दी जा चुकी हैं। उन्होंने महिलाओं के लिए सृजन के नाम से एक पुस्तक भी लिखी है। सरिता के मुताबिक जब उन्होंने बच्चों और महिलाओं की स्थिति को देखा तो काम के जरिए खुद को व्यक्त करना शुरू कर दिया। चार इंटरनेशनल अवॉर्ड से सम्मानित सरिता घरेलू हिंसा से पीडि़त महिलाओं को निशुल्क कानूनी सलाह दिलवाती हैं। वे लोगों को बच्चों को गोद लेने के प्रति भी जागरुक करती हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं के नारे को लेकर भी सरिता काम कर रही हैं। सरिता कहती हैं कि अपने आसपास जब उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या की घटनाएं होती देखीं, तब उन्हें लगा कि आमजन की मानसिकता में बदलाव किए जाने की जरूरत है और इसी दिशा में प्रयास शुरू कर दिए। इस दौरान परेशानियां भी झेली लेकिन हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने चार साल की उम्र में पहली बार एक स्वास्थ्य शिविर में अपनी भागीदारी निभाई तब तो वह भी नहीं जानती थी कि समाज सेवा होती क्या है।
अंगदान के लिए प्रेरित
सरिता अंगदान के लिए भी आमजन को प्रेरित कर रही हैं। वे कहती हैं कि यदि हम अंगदान की मुहिम में शामिल होते हैं तो किसी एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद, किसी दूसरे व्यक्ति का जीवन बेहतर बना सकते हैं। बदलाव की नायिका के रूप में जाने जानी वाली सरिता का कहना है कि समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ लेखन के जरिए भी आवाज उठाई। वे दहेज का पुरजोर विरोध करते हुए कहती हैं यदि पिता से मिलने वाली पूंजी का उपयोग बेटी को आत्मनिर्भर बनाने में किया जा जाए, तो बेटी किसी पर निर्भर नहीं रहेगी।
उन्हें नेशनल प्राइड ऑफ इंडिया अवॉर्ड, आइडियल वुमन अचीवर अवॉर्ड, नेशनल स्टार ऑफ इंडिया अवॉर्ड सहित कई अन्य अवॉर्ड मिल चुके हैं। वे वैश्विक महिला प्रतिष्ठा पुरस्कार, आउट स्टेडिंग अचीवर्स अवॉर्ड, आइकोनिक दीवा अवॉर्ड, अंतरराष्ट्रीय महिला उपलब्धि पुरस्कार सहित कई अन्य अवॉर्ड से भी सम्मानित हो चुकी हैं। उनका कहना है कि समाज में बदलाव लाने के लिए कुछ कदम हमें उठाने ही होंगे। वे उद्यमी महिलाओं को मंच प्रदान कर रही हैं।