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Rajasthan Congress: क्या अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की अदावत अब खत्म हो जाएगी?

Rajasthan Politics: कांग्रेस के वरिष्ट नेता अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की अदावत क्या अब खत्म हो जाएगी? पढ़ें खास रिपोर्ट-

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ashok gehlot and sachin pilot

अशोक गहलोत और सचिन पायलट (फोटो-पत्रिका नेटवर्क)

Rajasthan Politics: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच की अदावत क्या अब खत्म हो जाएगी? हालिया बयानों ने यह संदेश दिया है कि दोनों नेता अब अतीत की तल्खियों को पीछे छोड़कर संगठनात्मक एकजुटता की ओर बढ़ने का संकेत दे रहे हैं। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 कांग्रेस ने सचिन पायलट के नेतृत्व में जीता था। उस समय सचिन पायलट ने बतौर कांग्रेस प्रदेशअध्यक्ष खूब मेहनत की जिसका का असर चुनाव परिणाम में नजर आया और पार्टी की सत्ता में वापसी हुई।

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2013 में कांग्रेस को करारी हार मिली थी। भाजपा ने 163 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस महज 21 सीटों पर सिमट गई। पार्टी की हार के बाद पार्टी नेतृत्व ने बड़ा कदम उठाते हुए 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस की कमान सौंपी। अशोक गहलोत समर्थक खेमे को यह रास नहीं आया। धीरे-धीरे संगठन में गुटबाजी की चर्चाएं तेज होने लगीं।

2014 के लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए और भी निराशाजनक साबित हुए। राजस्थान में पार्टी का खाता तक नहीं खुला। खुद सचिन पायलट भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। इसके बाद पायलट और गहलोत के बीच राजनीतिक मतभेदों की चर्चा और तेज हो गई। वर्ष 2017 में अशोक गहलोत को गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात का प्रभारी बनाया गया।

गहलोत के राजस्थान की राजनीति से कुछ समय के लिए दूर होने पर पायलट ने संगठन के​ लिए खूब मेहनत की और और पार्टी को जीत मिली। लेकिन जीत का ताज सचिन की जगह अशोक गहलोत को मिला। अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाया गया और सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री के पद से संतोष करना पड़ा। यहीं से दोनों के बीच शुरू हुई सियासी 'जंग' अब तक जारी है। 'मानेसर कांड' सहित पिछले घटनाक्रमों पर गौर करें तो दोनों के बीच राजनीतिक दूरी पूरी तरह खत्म होना मुश्किल लगता है।

अप्रेल में दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अशोक गहलोत ने सार्वजनिक रूप से सचिन पायलट के साथ रिश्तों में मिठास की बात कही थी, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने फिर सचिन पर निशाना साधा। पार्टी आलाकमान आगामी विधानसभा चुनाव में हर हाल में जीत चाहता है, जिसके लिए अभी से तैयारियों भी शुरू कर दी गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि जल्द सचिन पायलट को प्रदेश में बड़ी भूमिका दी जा सकती है। पार्टी का आधिकारिक रुख है कि वह सभी को साथ लेकर चुनावी रणनीति तैयार करना चाहती है।

दौसा में मीडिया से बातचीत के दौरान सचिन पायलट ने अशोक गहलोत के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने गहलोत का वक्तव्य सुना है। उनकी समझ के अनुसार गहलोत ने कहा कि जिस प्रकार उनका अपने पुत्र के प्रति स्नेह और लगाव है, वैसा ही स्नेह उनके प्रति भी रहा है। पायलट ने कहा कि हम सभी कांग्रेस के सिपाही हैं और राहुल गांधी के ‘मोहब्बत की दुकान’ के संदेश को आगे बढ़ाते हुए सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलकर भाजपा का मुकाबला करना चाहिए।

सचिन पायलट ने दिया एकजुटता का संदेश

सचिन पायलट ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा और संगठन को मजबूत करने के लिए सभी को साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने संकेत दिए कि व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर पार्टी हित को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है। उनके बयान को कांग्रेस में सामंजस्य और संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अशोक गहलोत ने दी सफाई

उधर, कांग्रेस अध्यक्ष पद से जुड़े वर्ष 2022 के घटनाक्रम पर हाल में दिए गए अपने बयानों को लेकर अशोक गहलोत ने गुरुवार को फिर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने जो कुछ भी कहा, पूरी ईमानदारी और दिल से कहा।उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं था, बल्कि उन परिस्थितियों को सामने रखना था जिनके कारण यह धारणा बनी कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष पद स्वीकार नहीं किया। उन्होंने केवल तथ्यात्मक घटनाओं का उल्लेख किया है और यदि किसी को किसी बात पर आपत्ति है तो वह चर्चा के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मंशा किसी नेता को कटघरे में खड़ा करने की नहीं थी।

‘बच्चों की तरह थे, पायलट ने सही कहा’

अशोक गहलोत ने कहा कि सचिन पायलट ने जो कहा, वह सही है। उन्होंने कहा, हम बचपन से एक-दूसरे के परिवारों के संपर्क में रहे हैं। मैं पहले भी कह चुका हूं कि दोनों बच्चे की तरह ही थे। पायलट ने वही बात दोहराई है, इसमें कोई बुरी बात नहीं है। गहलोत ने कहा कि उनके मन में किसी के प्रति दुर्भावना नहीं है और उन्होंने जो भी कहा, दिल से कहा।

बयान के बाद तमाम मुद्दे खत्म हो जाएंगे

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि आज के बयान के बाद तमाम मुद्दे खत्म हो जाएंगे सब लोग करीब आएंगे। वह पहले भी ‘फॉरगेट एंड फॉरगिव’ यानी ‘भूलो और माफ करो’ का संदेश दे चुके हैं। उनका मानना है कि पुराने विवादों को पीछे छोड़कर सभी नेताओं को पार्टी और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय आ गया है जब सभी नेता व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए साथ आएं।