
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका (पत्रिका फाइल फोटो)
जयपुर। सुप्रीम कोर्ट की ओर से सीजेपी आंदोलन से जुड़े मामलों में पहले से दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दिए जाने के बाद संगठन की ओर प्रतिक्रिया सामने आई है। जयपुर में सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सरकार से 25 जुलाई को हुए समझौते का पालन करने की मांग करते हुए कहा कि उस दिन यह सहमति बनी थी कि पहले से दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी और आगे कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द लिखित आश्वासन नहीं दिया तो संगठन दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगा। आशुतोष रांका इसके पहले राजस्थान यूनिवर्सिटी पहुंचे थे, जहां अनशन पर बैठे छात्र नेता शुभम रेवाड़ को समर्थन दिया।
आशुतोष रांका ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा एफआईआर में जांच आगे बढ़ाने की अनुमति दी है, लेकिन सरकार ने अदालत में इस मुद्दे पर कोई विरोध दर्ज नहीं कराया। उनके मुताबिक, 25 जुलाई को सरकार और आंदोलनकारियों के बीच स्पष्ट सहमति बनी थी कि सभी मौजूदा एफआईआर वापस ली जाएंगी और भविष्य में भी नए मामले दर्ज नहीं किए जाएंगे। उन्होंने सरकार से उस समझौते का सम्मान करते हुए लिखित समझौता सार्वजनिक करने और सभी मामलों को वापस लेने की मांग की।
रांका ने कहा कि अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान या लिखित आश्वासन नहीं मिला है। उनका कहना था कि यदि जल्द कोई स्पष्ट निर्णय नहीं आता है तो सीजेपी फिर से आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन अपने किसी भी छात्र या युवा कार्यकर्ता को अकेला नहीं छोड़ेगा और किसी भी एजेंसी या पुलिस कार्रवाई के दौरान उनका साथ देगा।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान आशुतोष रांका ने अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत के 'गटर जेनरेशन' वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाषा और गुंडागर्दी पर कंगना रनौत को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। रांका ने आरोप लगाया कि आंदोलन से जुड़े लोगों पर हमले हुए और स्याही फेंकने जैसी घटनाएं भी सामने आईं। उन्होंने कहा, "हमें कॉकरोच और गटर कहा गया, लेकिन यही लोग सड़क पर उतरकर आपके एक मंत्री के इस्तीफे की वजह बने।"
सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी आंदोलन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अंतरिम आदेश पारित करते हुए पहले से दर्ज एफआईआर की जांच और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई है। अदालत ने किसी भी एफआईआर को स्वतः निरस्त नहीं किया और न ही जांच रोकने का निर्देश दिया। अंतिम फैसला आने तक संबंधित एजेंसियां सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच जारी रख सकती हैं। इसी बिंदु को लेकर सीजेपी ने अपनी आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह 25 जुलाई को हुए समझौते की भावना के विपरीत है।
Updated on:
29 Jul 2026 10:51 am
Published on:
28 Jul 2026 11:18 pm
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