भारत की प्राचीन एवं पारंपरिक कलाएं अनोखी हैं। यह भारत की विविधता का सुंदर रूप दर्शाती हैं। इन्हीं कलाओं को संरक्षित कर आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं कई महिला कलाकार। उदयपुर की रेणु और सरला जहां कशीदाकारी को देश के बाहर लोकप्रिय बनाने में लगी हैं वहीं इंदौर की समीक्षा नायक गोंड और भील कला को आगे बढ़ा रही हैं।
उदयपुर वनांचल में रहने वाली जनजातीय महिलाएं अपनी प्राचीन कला को आज भी सहेजे हुए हैं। इन कलाकृतियों की विश्व भर में मांग भी है, लेकिन इन महिलाओं के पास अपनी कला लोगों तक पहुंचाने का माध्यम नहीं होता। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उदयपुर की वेणु व सरला ने अपनी टीम के साथ मिलकर इनकी कला लोगों तक पहुंचाने की ठानी और आज वह उदयपुर, झाड़ोल, खेरवाड़ा जैसे लगभग 20 से अधिक गांवों में प्रशिक्षण देकर आर्टिजंस के ग्रुप बनाकर रोजगार दे रही हैं।
बना रहे World Class Products
कशीदाकारी का उपयोग करते हुए ये विभिन्न प्रकार के एक्सक्लूसिव पर्स, स्टेशनरी, होम फर्निशिंग और विशेषकर बच्चों के लिए बोर्ड गेम्स आदि बना रही हैं। इनकी मांग भारत के प्रमुख शहरों और विदेशों में भी रहती है। देश के बड़े मेलों कार्यक्रमों, ट्राईफेड और अन्य सरकारी आयोजनों से लोगों तक इन जनजातीय कलाकारों की कला पहुच रही है। छोटे प्रयासों से शुरू हुई यह संस्था अब राष्ट्रीय स्तर पर सर्टिफाइड हो चुकी है।
जीवन में उत्साह और शिक्षा के अवसर: सरला का कहना है कि ट्रेनिंग के माध्यम से वहां की महिलाओं को रोजगार तो मिला ही साथ ही कई ऐसी लड़कियां जो बिना उद्देश्य जीवन जी रही थीं, उनके जीवन में नई उमंग आई है। इस क्षेत्र में जो लड़कियां अभावों के कारण पढ़ नहीं पाती थीं, अब वह खुद की कमाई से पढ़ भी रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं।
लीड रोल में हों महिलाएं - इंंदौर की समीक्षा नायक ने इन कलाओं को एक मंच देने का प्रयास किया और आज वह मध्यप्रदेश के अनेक जनजातीय क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार उपलब्ध करवा रही हैं। समीक्षा बताती हैं कि उनका प्लेटफॉर्म वीमन सेंट्रिक है, जहां वे मध्यप्रदेश के अनेक क्षेत्रों विशेषकर महेश्वर के आसपास की जनजातीय महिलाओं को रोजगार और अपनी कला बताने के अवसर दे रही हैं। वह अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से गोंड और भील कला को प्रमोट करती हैं। समीक्षा का कहना है कि इस क्षेत्र में अधिकांश काम महिलाओं द्वारा संपादित होता है, फिर भी लीड रोल में महिलाएं नहीं आ पातीं, इसलिए वे महिला आर्टिजंस को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।