जयपुर

दहशत में राजधानी! पहली बार नहीं हुई ‘हत्यारी लूट‘ की वारदात, परिजनों ने की ओमप्रकाश की आंखें दान

चारों तरफ सुरक्षा घेरा, फिर भी बच निकले हत्यारे...

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Jan 09, 2018

जयपुर। शहर में सोमवार को ‘सरकार’ के घर से महज 1.5 किलोमीटर दूर दिनदहाड़े हुई लूट की कोशिश ने सभी को हिला कर रख दिया। सिविल लाइंस से सटे नंदपुरी इलाके में लुटेरों ने डेयरी बूथ कलेक्शन एजेंट को 7.85 लाख से भरा बैग लूटने की कोशिश में गोली मार दी। उसकी मौत हो गई। वारदात के बाद शहर में नाकाबंदी करवाई गई लेकिन लूटेरों का सुराग नहीं लगा।

नन्दपुरी में सोमवार को हुई लूट की वारदात कई सवाल खड़े करती हैं। इसमें चौंकाने वाली बात यह रही कि मौके से कुछ ही दूरी पर राजभवन, सोडाला थाना सहित कई अन्य वीवीआईपी क्षेत्र हैं। इसके बावजूद नन्दपुरी से लुटेरे फरार हो गए। वहीं डेयरी बूथ से कलेक्शन करने वाला ओमप्रकाश लुटेरों का पहला शिकार नहीं है। शहर में ऐसे लुटेरे लंबे समय से सक्रिय हैं। पिछले साल भी लुटेरों ने ऐसे ही 3 कलेक्शन एजेंटों पर हमला कर लाखों रुपए लूटे थे।

अस्पताल में इलाज नहीं मिलने का आरोप
हल्ला सुन घटना स्थल पर पहुंचे स्थानीय निवासी योगेन्द्र ने लहूलुहान ओमप्रकाश तुंरत अपनी कार से अस्पताल पहुंचाया। सूचना पर ओमप्रकाश के परिजन भी अस्पताल में पहुंच गए। उधर, परिजन का आरोप है कि अस्पताल में लाने के बाद चिकित्सकों ने उसकी सुध नहीं ली। इसके चलते उसका अत्यधिक खून बह गया और उसकी मौत हो गई। परिजन ने ओमप्रकाश की आंखें भी दान की हैं।

यूं सुरक्षित कर ले जाता था बैग
ओमप्रकाश के परिजन ने बताया कि ओमप्रकाश बैग की बड़ी डोरी को गले में कंधे पर लपेट कर रखता था। जबकि छोटी डोरियों को हाथ में लपेटकर रखा था, इससे कोई उससे बैग नहीं छिन सके। उसके भाई भोलेशंकर ने बताया कि वह सतर्क रहता था। बाइक चलाते समय पल-पल पीछे देखता था कि कोई उसका पीछा तो नहीं कर रहा है। हालांकि उनके भाई ने हिम्मत दिखाई, लेकिन बच नहीं सका। भोलेशंकर ने बताया कि पांच भाइयों में ओम सबसे छोटा था।

संयुक्त परिवार में रहता था ओम
पांच भाइयों में ओम सबसे छोटा था और उससे छोटी तीन बहनें हैं। ओम का बेटा वैभव 12वीं कक्षा में पढ़ता है। मृतक का एक भाई परिवार सहित अलग रहता है, जबकि वह अपनी पत्नी रेखा व बेटे के साथ चार भाइयों के संग संयुक्त परिवार में रहता था। ओम की गोली लगने की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। रेखा व अन्य परिवार की महिलाओं का रो रोकर बुरा है। पड़ोसियों ने बताया कि ओम मिलनसार और हंसमुख था।

ओमप्रकाश है लुटेरों का चौथा शिकार
हालांकि बाद में पुलिस ने तीनों लूट का खुलासा करते हुए आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। चौंकाने वाली बात यह है कि इन चारों वारदातों में लुटेरों का तरीका एक सा रहा।

चार वारदात, तरीका एक
सोमवार .... लुटेरों ने वारदात के लिए सोमवार का दिन चुना बड़ा कारण है कि रविवार का अवकाश होने के कारण सोमवार को दो दिन का कलेक्शन होता है।
घात लगाना... लुटेरे पीडि़त की पूरी रैकी कर रखते हैं। इसके बाद वे पीडि़त के रास्ते में सुनसान जगह को चुनते हैं और वहीं घात लगा कर बैठते हैं। फिर हमला करते हैं।

सिर पर वार... लुटेरे पीडि़त के सिर पर वार करते हैं। इससे पीडि़त अचेत हो जाता है और वे आसानी से अपना काम कर फरार हो सकते हैं।

हूूबहू तीन घटना
14 अगस्त 2017
महारानी फार्म पुलिया के पास अजय सिंह पर हमला कर 9 लाख रुपए लूट लिए थे।

20 मई 2017
झालाना-ओटीएस मार्ग पर कैशियर जितेन्द्र पर हमला कर 2.18 लाख रुपए की लूट

22 मई 2017
जगतपुरा सीबीआई फाटक के पास कैलाश गुर्जर से साढ़े चार लाख रुपए की लूट कर हुए थे लुटेरे फरार।

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Published on:
09 Jan 2018 11:56 am
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