जयपुर के एसएमएस अस्पताल को बुधवार सुबह बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। अज्ञात शख्स ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर अस्पताल को बम से उड़ाने की धमकी दी। सूचना मिलते ही पुलिस और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुंचे।
SMS Hospital Bomb Threat: राजस्थान में सरकारी भवनों को बम से उड़ाने की धमकी का सिलसिला नहीं थम रहा है। बुधवार को जयपुर के एसएमएस अस्पताल को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। अज्ञात शख्स ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर अस्पताल को बम से उड़ाने की धमकी दी। सूचना मिलते ही पुलिस और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुंचे और अस्पताल परिसर के चप्पे चप्पे की गहन तलाशी शुरू की गई। सिविल डिफेंस टीम भी मौके पर पहुंची।
गौरतलब है कि पूर्व में राजस्थान विधानसभा भवन, राजस्थान हाईकोर्ट समेत शहर के प्रमुख भवनों को बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। हालांकि पुलिस और संबंधित एजेंसियों को जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिलने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
बम से उड़ाने की धमकियों में जयपुर सबसे अधिक प्रभावित रहा। वर्ष 2024 में राजधानी में 24 मामले सामने आए, जबकि वर्ष 2025 में 34 धमकियां मिलीं। जोधपुर दूसरे स्थान पर है, जहां 2024 में 10 और 2025 में 9 मामले सामने आए।
कोटा में 2024 में एक मामला था, जो 2025 में बढ़कर सात हो गए। अजमेर में भी मामलों में वृद्धि दर्ज की गई और वहां दो के मुकाबले सात धमकियां मिलीं। उदयपुर में 2024 में एक और 2025 में चार मामले दर्ज किए गए।
अलवर और श्रीगंगानगर में 2024 में कोई मामला नहीं था, लेकिन 2025 में अलवर में तीन और श्रीगंगानगर में दो धमकियां मिलीं। सवाईमाधोपुर में 2024 में दो मामले सामने आए थे, जबकि 2025 में अब तक कोई मामला सामने नहीं आया।
पुलिस के अनुसार इस वर्ष जनवरी से अब तक प्रदेश में बम विस्फोट की करीब 40 धमकियां मिल चुकी हैं। जबकि वर्ष 2024 और 2025 में यह क्रमशः 40 और 55 थीं। इस वर्ष शुरुआती चार माह में भी मिलने वाली धमकियों में ज्यादा स्कूल, एयरपोर्ट और कोर्ट-कलक्ट्रेट परिसर ही शामिल रहे।
ई-मेल और डिजिटल माध्यमों (सोशल मीडिया) के जरिये दी जा रही धमकियों के कारण जांच एजेंसियों के सामने तकनीकी चुनौतियां बढ़ी हैं। अधिकांश मामलों में धमकियां फर्जी साबित होती हैं, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत हर सूचना को गंभीरता से लेना पड़ता है। प्रदेश में धमकियों के मामलों में अब तक जांच एजेंसियां आरोपियों को पकड़ना तो दूर उनकी पहचान तक करने में नाकाम रही है।