पाकिस्तान से भारतीय सीमा में आए पांच दुर्लभ पक्षी पिछले 3 साल से जोधपुर के माचिया जैविक उद्यान के समीप बने वन विभाग के रेस्क्यू सेंटर में कैद हैं।
पाकिस्तान से भारतीय सीमा में आए पांच दुर्लभ पक्षी पिछले 3 साल से जोधपुर के माचिया जैविक उद्यान के समीप बने वन विभाग के रेस्क्यू सेंटर में कैद हैं। वहीं तीन पक्षी उड़ान भरने का इंतजार करते-करते सलाखों में ही दम तोड़ चुके हैं। जासूसी के शक में पकड़े इन पक्षियों को कैदी की तरह ही रखा जा रहा है। इन पक्षियों के यूएई का टैग लगा हुआ था।
दरअसल, बस्टर्ड समूह के दुर्लभ पक्षी तिलोर (होवारा बस्टर्ड) मध्य एशिया से पाकिस्तान की सीमा पार कर पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में विचरण करने आते हैं। इस दौरान सीमा पर तारबंदी में उलझकर चोटिल हो जाते हैं। इन पक्षियों को सीमा सुरक्षा बल के जवान जासूसी के शक में पकड़कर जांच पूरी होने के बाद इलाज के लिए वन विभाग को सौंप देते हैं। रेस्क्यू सेंटर में सीमावर्ती इलाकों से जून 2020 से अप्रैल 2023 तक अलग-अलग समय में कुल आठ दुर्लभ पक्षी पकड़े गए। एक सौन चिरैया भी घायल अवस्था में लाई गई। पकड़े गए पक्षियों के पंख व पैर में चोट थी, जो कुछ समय बाद ठीक हो गई थी। इन पक्षियों को छोड़ा जाना था ।
वन विभाग के अफसरों की मनमर्जी के कारण ये सलाखों के पीछे चले गए। गत महीनों विभिन्न कारणों से आठ में से तीन पक्षियों की मौत हो गई। इसके बाद भी गंभीरता नहीं बरती जा रही है। डीसीएफ वाइल्ड ने कई बार अरण्य भवन में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को इन पक्षियों को आजादी दिलाने के लिए पत्र भी लिखा लेकिन हालात जस के तस हैं।
सीसीटीवी कैमरे से निगरानी
इन पांच दुर्लभ पक्षियों में से तीन को अलग एक बड़े एनक्लोजर में रखा जा रहा है जबकि दो को अलग- अलग एनक्लोजर में। सीसीटीवी कैमरे से मॉनिटरिंग होती है। किसी को उनके पास जाने की इजाजत नहीं है।
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डिस्प्ले एरिया में रखने की तैयारी !
वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के नियम के तहत इलाज के लिए रेस्क्यू किए गए पक्षी को स्वस्थ होने के बाद वापस आजाद कर देना चाहिए लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह भी सामने आया कि इन पक्षियों को दुर्लभ प्रजाति के होने की वजह से माचिया जैविक व उद्यान के डिस्प्ले एरिया में भी रखने की तैयारी की बात सामने आ रही है लेकिन इसके लिए अफसरों को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।