राजधानी में भले ही इन दिनों सड़क सुरक्षा सप्ताह चल रहा है, लेकिन कुछ परिवार सड़क पर बसों को देखते ही कांप जाते हैं
जयपुर
राजधानी में भले ही इन दिनों सड़क सुरक्षा सप्ताह चल रहा है, लेकिन कुछ परिवार सड़क पर बसों को देखते ही कांप जाते हैं, रोने लग जाते हैं। कई घरों के चिराग बुझा चुकी लो फ्लोर आज भी सड़क पर वही डराने वाली रफ्तार से ही दौड़ रही है। बसों की रफ्तार देखकर अपनों को खो चुके लोगों की यादें ताजा हो जाती हैं। समय भले ही आगे बढ़ गया, लेकिन वे अपनो की यादें नहीं मिटा पा रहे हैं। पत्रिका ऐसे कुछ परिवारों तक पहुंचा, जिन्होंने अपनों को इन बसों की तेज रफ्तार के चलते गंवा दिया।
फोटो और खबर ही अब मां की यादगार
हांडीपुरा की रईसा के लिए बेटे फिरोज (24) का फोटो और सड़क पर मरने की खबर ही अब यादगार है। 19 सितम्बर को सड़क पर जवान बेटे को खो चुकी मां उसका नाम सुनकर ही रो पड़ती है। जिस दिन उसकी सगाई थी, उसी दिन वे खरीदारी करने परकोटा गया था। उसके बाद रईसा ने बेटे का मरा हुआ मुंह ही देखा। जलमहल के पास बेकाबू बस ने बाइक सवार बेटे को उससे छीन लिया। फिरोज के मामा दस्तगीर ने बताया कि हादसे के पांच मिनट पहले उसके दोस्त जलमहल के पास मिले थे। वह बोला कि जल्दी में है, मां उसका इंतजार कर रही है।
ब्रेक लग जाते तो वह आज खेल रहा होता
बांस बदनपुरा निवासी बबलू खान बाइक मैकेनिक है। लो फ्लोर बसों के बेकाबू होकर चलने का दर्द संभव है उससे ज्यादा कोई और न जान सके। इसी लो फ्लोर बस के नहीं रुकने से उसका 11 साल का बेटा मुजम्मिल हमेशा के लिए उससे दूर हो गया। बेटे को वह पढ़ा-लिखाकर कारी व मुफ्ती बनाना चाहता था, लेकिन 25 अगस्त का दिन दुखद खबर लेकर आया। साइकिल से जा रहा मुजम्मिल बस की चपेट में आने से जलमहल के नाले में गिर गया और वहीं दम तोड़ दिया।
डरा रहे लो फ्लोर के आंकड़े
- 15 माह में ली 15 की जान
- 45 वाहन रौंदे, 39 घायल
यूं मचाई तबाही
जनवरी 2017-मार्च 2018
दुर्घटना थाना ईस्ट
वर्ष -हादसे -घायल मृतक
2017 -17 -15 3
2018 - 4 -3 1
दुर्घटना थाना नॉर्थ
वर्ष -हादसे -घायल -मृतक
2017 -6 -6 2
2018 -2 -1 1
दुर्घटना थाना वेस्ट
वर्ष -हादसे -घायल मृतक
2017- 11- 8 4
2018- 3- 3 1
दुर्घटना थाना साउथ
वर्ष -हादसे -घायल- मृतक
2017 -2 -2 2
2018- 2- 1 1
तीन माह में 329 लोगों की मौत
राजधानी जयपुर में इसी वर्ष 2018 मार्च तक 192 लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। इस वर्ष जयपुर पूर्व में 51, जयपुर पश्चिम में 75, जयपुर उत्तर में 16 और जयपुर दक्षिण में 50 लोगों की मौत हो गई। जबकि जयपुर ग्रामीण में 137 लोग सड़क दुर्घटना का शिकार बने।