जयपुर

Rajasthan News : ‘रेवड़ियों’ की तरह बांटी फ़र्ज़ी डिग्रियां- मिली सरकारी नौकरी, दो यूनिवर्सिटीज के खिलाफ SOG करेगी जांच

Supreme Court Ruling Fake Degree 2026 | फर्जी डिग्री रैकेट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला। एमपी और उत्तराखंड की दो बड़ी यूनिवर्सिटीज के खिलाफ राजस्थान SOG जांच से हटी रोक। जानिए भर्तियों पर इसका असर।
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Jul 27, 2026
Supreme Court Allows Rajasthan SOG Probe Fake Degree Universities
Rajasthan SOG Probe Fake Degree Universities - AI PIC

राजस्थान में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों ईमानदार और मेहनती बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले अंतरराज्यीय फर्जी डिग्री रैकेट पर सुप्रीम कोर्ट ने 'चाबुक' चलाया है। सरकारी शिक्षक, पीटीआई (PTI) और अन्य प्रतियोगी भर्तियों में बैकडेट डिग्रियों का खेल रचने वाली मध्य प्रदेश की श्री सत्य साई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज और उत्तराखंड की हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी के खिलाफ अब राजस्थान पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसओजी (SOG) की जांच की रफ्तार तेज होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान SOG द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश और राजस्थान (जोधपुर) हाईकोर्ट के उन विवादित आदेशों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है, जिनकी आड़ लेकर आरोपी विश्वविद्यालय प्रशासन और बिचौलिए कानूनी कार्रवाई से बच रहे थे। इस अहम न्यायिक फैसले से राजस्थान के उन हजारों योग्य अभ्यर्थियों में उम्मीद की नई किरण जगी है, जिनके हक पर फर्जी डिग्रियों के सहारे डाका डाला जा रहा था।

'रेवड़ियों' की तरह बांटी डिग्रियां, सरकारी भर्तियों में हुआ इस्तेमाल

राजस्थान SOG की शुरुआती जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे राजस्थान की पूरी शिक्षा और भर्ती प्रणाली की जड़ों को हिला देने वाले हैं।

बीपीएड और पीटीआई भर्ती में फर्जीवाड़ा: SOG की जांच में सामने आया कि मध्य प्रदेश के सीहोर-भोपाल स्थित श्री सत्य साई यूनिवर्सिटी और उत्तराखंड की हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी से बीपीएड (B.P.Ed.) सहित अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की डिग्रियां कथित रूप से भारी भरकम रकम लेकर बैकडेट में तैयार की गईं।

राजस्थान की भर्तियों में सीधा इस्तेमाल: इन फर्जी डिग्रियों और फर्जी मार्कशीट का सीधा उपयोग राजस्थान में आयोजित पीटीआई भर्ती परीक्षा और अन्य तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्तियों में अंतिम चयन पाने के लिए किया गया।

यूनिवर्सिटी प्रबंधकों और दलालों के गठजोड़ ने मार्कशीट और डिग्रियों का वितरण इस तरह किया मानो वे कोई प्रतिष्ठित शैक्षणिक प्रमाणपत्र न होकर सामान्य कागज की रेवड़ियां हों। इससे वर्षों से दिन-रात एक कर तैयारी करने वाले वास्तविक और योग्य अभ्यर्थियों का हक सीधे तौर पर मारा गया।

30 गिरफ्तारियां और 300 से अधिक संदिग्ध रडार पर

राजस्थान SOG द्वारा चलाए जा रहे इस बड़े अभियान में अब तक कई बड़ी गिरफ्तारियां और जब्तियां हो चुकी हैं, लेकिन अदालती रोक के कारण मुख्य आरोपी बचे हुए थे। SOG की टीम ने फर्जी डिग्री बेचने वाले गिरोह के मुख्य दलालों, एजेंटों और फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी पाने वाले लगभग 30 से अधिक लोगों को पहले ही सलाखों के पीछे भेज दिया है।

वर्तमान में राजस्थान के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत या चयन सूची में शामिल 300 से अधिक ऐसे अभ्यर्थियों की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है, जिन्होंने इन दो विश्वविद्यालयों से बैकडेटेड डिग्रियां हासिल की हैं।

जनवरी 2026 में SOG ने मध्य प्रदेश स्थित यूनिवर्सिटी कैंपस में अचानक छापा मारा था, जहां से 67 से ज्यादा संदेहास्पद बीपीएड डिग्रियां, मुहरें, ब्लैंक मार्कशीट और हार्ड डिस्क बरामद की गई थीं।

अदालती स्टे से थम गई थी जांच, सुप्रीम कोर्ट ने खोला रास्ता

उच्च न्यायालयों से मिले अंतरिम संरक्षण के कारण SOG की जांच की कड़ियां अचानक रुक गई थीं, जिसे अब देश की शीर्ष अदालत ने बहाल कर दिया है। इलाहाबाद, जबलपुर (एमपी) और जोधपुर (राजस्थान) हाईकोर्ट द्वारा विश्वविद्यालय प्रबंधनों और संदिग्धों को गिरफ्तारी व जांच से दिए गए अंतरिम संरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह से निष्प्रभावी कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट माना कि संबंधित पक्षों को 24 अप्रैल 2026 को गिरफ्तारी से जो अंतिम संरक्षण दिया गया था, वह 18 मई 2026 तक ही प्रभावी था। उसके बाद भी उच्च न्यायालयों के संदर्भ से राहत जारी रखना स्पष्ट रूप से अवैध था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 7 सितंबर 2026 की तारीख तय की है, तब तक SOG को जांच में पूरी छूट मिल गई है।

अब दोनों यूनिवर्सिटीज के सिस्टम की होगी जांच : SOG ADG

राजस्थान SOG के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) विशाल बंसल ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता लाने वाला एक मील का पत्थर बताया है।

एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, जबलपुर और जोधपुर हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर हटने के बाद अब राजस्थान SOG की टीम दोनों विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, प्रशासनिक कर्मचारियों और दलालों के पूरे सिंडिकेट को समन भेजकर पूछताछ करेगी।

SOG की इस जांच रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान सरकार द्वारा ऐसे सभी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त करने और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे चलाने की प्रक्रिया भी बहुत जल्द शुरू की जाएगी।

Updated on:
27 Jul 2026 11:09 am
Published on:
27 Jul 2026 11:09 am