Karnataka Election Results 2018 LIVE: कर्नाटक की 'सत्ता' हासिल करने के लिए ऐसे चला 'लेट नाईट' सियासी ड्रामा, राजस्थान की भी पैनी नज़र
जयपुर/ बेंगलूरु।
कर्नाटक चुनाव में सियासी हलचलों पर राजस्थान की भी नज़र है। इसी साल के आखिर में प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में कर्नाटक में जिसकी भी सरकार बनती है उसकी पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं में एक नए उत्साह का संचार होगा। वैसे चुनाव के नतीजे आने के बाद भी सरकार किसी बनेगी इसे लेकर सस्पेंस बरकरार है। गौरतलब है कि कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान राजस्थान से भी कांग्रेस और बीजेपी के कई दिग्गज नेता पहुंचे थे। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत तो इस समय वहां कांग्रेस पार्टी की नैय्या पार करवाने के लिए अहम् भूमिका में हैं। वे ही कांग्रेस की ओर से रणनीतिकार के तौर पर मोर्चा संभाले हुए हैं और जोड़-तोड़ की सियासत का अपना अनुभव लगा रहे हैं।
रात भर चला सियासी 'ड्रामा'
कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाने से आज उच्चतम न्यायालय ने इन्कार कर दिया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि उनका मुख्यमंत्री के पद पर बने रहना मामले के अंतिम फैसले पर निर्भर होगा।
न्यायमूर्ति अर्जन कुमार सिकरी, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने रात सवा दो बजे से सुबह साढ़े पांच बजे तक चली सुनवाई के बाद कहा कि वह राज्यपाल के आदेश पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है, इसलिए येदियुरप्पा के शपथ-ग्रहण समारोह पर रोक नहीं लगायेगी।
न्यायालय ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि उनका मुख्यमंत्री पद पर बने रहना इस मामले के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए शुक्रवार साढ़े 10 बजे का समय निर्धारित किया, साथ ही भाजपा को नोटिस जारी करके उन दो पत्रों की प्रति अदालत के समक्ष जमा कराने को कहा है, जो उसकी ओर से राज्यपाल को भेजे गये थे।
शीर्ष अदालत कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला की ओर से भाजपा को सरकार बनाने का न्योता भेजने को चुनौती देने वाली कांग्रेस-जनता दल (सेक्यूलर) की याचिका की सुनवाई कर रही थी।
इससे पहले राज्यपाल वजूभाई वाळा ने 12 मई को पंद्रहवीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी भाजपा को पहले सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीएस येड्डियूरप्पा के गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की बात हुई।
राज्यपाल ने येड्डियूरप्पा को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन की मोहलत दी। सरकार बनाने के लिए 'दो पूर्व मुख्यमंत्रियों' के बीच मंगलवार को चुनाव परिणाम आने के बाद से ही सियासी जंग चल रही थी।
खंडित जनादेश आने के बाद भाजपा को सत्ता में आने से रोकने की रणनीति के तहत कांग्रेस ने जद (ध) को समर्थन देने की घोषणा की थी। विधानसभा चुनाव में भाजपा को 104, कांग्रेस को 78, जद (ध) को 37, बसपा और केपीजेपी को एक-एक सीट मिली थी।
मुलबागल से कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार जीता था। कांग्रेस-जद (ध) 117 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है। भाजपा को बहुमत के लिए 8 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है। इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री व जद (ध) नेता एचडी कुमारस्वामी भी बदले हालात पर कांग्रेस नेताओं से चर्चा करने के लिए शहर के बाहर उस रिजार्ट में पहुंचे जहां कांग्रेस के विधायक ठहरे हैं।
शपथ ग्रहण रुकवाने की कोशिश, कोर्ट में अर्जी
इस बीच, कांग्रेस ने राज्यपाल के फैसले को उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ बताते हुए देर रात येड्डियूरप्पा को शपथ दिलाने पर अंतरिम रोक लगाने की मांग को लेकर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया। येड्डियूरप्पा को आमंत्रण जारी किए जाने के करीब घंटे भर बाद कांग्रेस और जद (ध) ने अलग-अलग उच्चतम न्यायालय के रजिस्ट्रार को अर्जी देकर रात में ही मामले की विशेष सुनवाई करने की मांग की।
अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर कहा कि येड्डियूरप्पा ने बहुमत साबित करने के लिए 7 दिन की मोहलत मांगी थी लेकिन राज्यपाल ने उन्हें 15 दिन का वक्त दे दिया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल केंद्र के इशारे पर काम कर रहे हैं। जद (ध) नेता व पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि येड्डियूरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन की मोहलत देकर राज्यपाल ने विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए खुला मौका दे दिया है।
ट्वीट का खेल
राज्यपाल से औपचारिक आमंत्रण मिलने से पहले ट्विटर भी संदेशों का खेल चला। भाजपा नेता सुरेश कुमार ने सबसे पहले ट्विटर और फेसबुक पर येड्डियूरप्पा को आमंत्रण मिलने और गुरुवार सुबह साढ़े 9 बजे शपथ लेने की जानकारी दी। इसके बाद प्रदेश भाजपा ने भी ऐसा ही ट्वीट किया लेकिन चंद मिनटों बाद दोनों ट्वीट डिलीट हो गए । इससे लेकर संशय की स्थिति बन गई।
हालांकि, आधे घंटे बाद भाजपा ने आमंत्रण मिलने की पुष्टि करते हुए दुबारा ट्वीट किया और पहले का ट्वीट डिलीट करने के लिए समय में गलती होने को कारण बताया। इससे पहले राजभवन से पुष्टि से पहले खुफिया विभाग के डीआइजी की ओर से सभी पुलिस अधीक्षकों को जारी पत्र में कहा गया है कि सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है लिहाजा सतर्क रहें।