जयपुर

एक्टर सुशांत सिंह ने जब जयपुर के रिक्शे वालों का दर्द बांटा तो फूट पड़े थे आंसू

बात करीब आज से 7 साल पुरानी है। जब जयपुर में यशराज बैनर की फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। शूटिंग के चलते चारों ओर खबर फैल गई कि शहर में प्रियंका चोपड़ा की बहन शूटिंग कर रही है और उनके साथ में 'पवित्र रिश्ता' सीरियल के एक्टर सुशांत सिंह अभिनय कर रहे हैं।

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Jun 14, 2020

इमरान शेख
जयपुर। बात करीब आज से 7 साल पुरानी है। जब जयपुर में यशराज बैनर की फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। शूटिंग के चलते चारों ओर खबर फैल गई कि शहर में प्रियंका चोपड़ा की बहन शूटिंग कर रही है और उनके साथ में 'पवित्र रिश्ता' सीरियल के एक्टर सुशांत सिंह अभिनय कर रहे हैं। हालांकि उस वक्त दोनों ही कलाकार एकदम नए थे। लेकिन शूटिंग के चलते शहर में उत्साह छा गया। शूटिंग स्थल पर भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। जिसके चलते कभी सेट आमेर लगाया जाता तो कभी नाहरगढ़।

एक दिन अलसुबह खबर मिली की आज शूटिंग बड़ी चौपड़ पर हवामहल के सामने स्थित द विंड कैफे पर हो रही है। जब शूटिंग का जायजा लिया तो देखा कि सेटअप लगाया जा रहा है और डायरेक्टर मनीष शर्मा यूनिट के लोगों को समझा रहे है कि शॉट आज ही ओके कर लेना है, क्योंकि यहां बहुत जल्दी भीड़ हो जाएगी। इतने में यूनिट के एक मेंबर का वॉकी—टॉकी बजता है। उसने तुरंत कहा सर, सुशांत और परिणीति तैयार है। लेकिन शॉट फिल्माया जाता उससे पहले चिलचिलाती धूप सभी के लिए परेशानी का सबब बन गई। फिर डायरेक्टर मनीष शर्मा सुशांत और परिणीति को शॉट समझाने में लग गए। इतने में लॉकल यूनिट हैड से बातचीत करने का मौका मिल गया और बताया कि सुशांत और परिणीति से बातचीत करनी है।

लेकिन उसने कहा कि आप डायरेक्टर मनीष सर से बात कर लीजिए, इतने शॉट शुरू हो गया, लेकिन ओके नहीं हो पाया। ऐसे में सभी कलाकार सुस्ताने लगे और लंच टाइप आ गया। मैंने मौका पाते ही सुशांत की ओर इशारा किया, उसने तुरंत बुलाया, पूछा क्या बात है, मैंने कहा, आप से बातचीत करनी है। उसने कुछ देर रूकने के लिए कहा और थोड़ी ही देर में चाय की टेबल पर बुला लिया। इस चाय की टेबल की खास बात यह थी कि इसके बिल्कुल सामने जयपुर की खास पहचान हवामहल की इमारत थी। जिसे देखकर सुशांत बहुत खुश लग रहे थे। उन्होंने एकाएक सवाल किया कि की इसकी खिड़कियों से कितनी ठंडी हवा आती होगी ना, मैंने कहा कि एक बार जाकर देख लीजिए, उन्होंने तुरंत जवाब दिया हां जरूर जाना होगा। खैर बताइए, क्या बातचीत करनी है।

मैंने सवाल किया आप एकदम नए है आगे की क्या रणनीति है? सुशांत ने जवाब दिया, देखिए मैं यहां अभिनेता की हैसियत से आया हूं। अभिनय मेरा जुनून है, जिसके लिए मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ दी। मेरा नंबर वन बनने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन मैं भविष्य में एक अच्छा एक्टर जरूर कहलाना पसंद करूंगा। मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मेरे करियर की शुरुआत के कुछ ही सालों में मुझे यशराज बैनर की फिल्मों में काम करने का मौका मिला। सच कहूं तो अंदर से बहुत डरा हुआ भी हूं और बाहर से खुश भी हूं। क्योंकि इस बैनर के साथ काम करना बहुत बड़ी बात है।

सुशांत ने आगे कहा कि मेरे करियर की शुरुआत बैकअप डांसर के रूप में हुई थी, लेकिन बालाजी टेलीफिल्मस की कास्टिंग टीम ने मेरी छुपी प्रतिभा को पहचाना और इसकी बदौलत मेरी टीवी की दुनिया में एंट्री हुई। मैंने पहली बार सीरियल किस देश में है मेरा दिल में प्रीत जुनेता का किरदार निभाया। इसके बाद जी टीवी के शो 'पवित्र रिश्ता' से घर—घर पहचाना जाने लगा।

फिर डांस रियलिटी शो जरा नच के दिखा—2 और झलक दिखला जा 4 में दिखकर यह लोकप्रियता और मजबूत करने की कोशिश में हूं। इस बीच उनका कहना था कि मेरी पहली फिल्म 'काय पो चे' ने उनके अंदर के डर को मार दिया, जिसके चलते उन्हें आगे बढ़ने की राह मिल गई। एक सवाल पर उनका कहना था कि मेरे माता—पिता नहीं चाहते कि मैं एक्टिंग या डांसिंग में जाउं, लेकिन मेरी मर्जी के आगे उनकी नहीं चली और मैंने उनके इंजीनियर बनने के सपने को तोड़ दिया।

जिंदगी भर याद रहेगी जयपुर के रिक्शे की सवारी
बातचीत का दौर चलता रहा, इतने में यूनिट के एक मेंबर ने कहा कि सर, रिक्शे सवारी तैयार है। मैंने तापाक से पूछा सुशांत आपको रिक्शे की सवारी करनी है? सुशांत बोले जी बिल्कुल कल भी की थी और आज भी करनी है, क्योंकि रिक्शे की सवारी मुझे पसंद है और मेरे से ज्याद परिणीति को। खैर एक बात तो है जयपुर के रिक्शे में बैठकर कमर में दर्द शुरू हो जाता है। सुशांत ने हंसते हुए कहा, गलियों में बहुत गडडे हैं, जिसकी वजह से ऐसा होता है, लेकिन मुख्य सड़कों पर कम है।

लेकिन एक बात तो है यहां के रिक्शे कोलकाता के रिक्शे से काफी अलग है। क्योंकि कोलकाता में तो हाथ से रिक्शों को खिंचा जाता है। लेकिन यहां ऐसा नहीं है, मगर चिलचिलाती धूप और बरसात की परवाह किए बिना यह रिक्शे वाले भारी-भरकम सवारियों को बिठाकर रोजाना सुबह से शाम तक जयपुर की ऊबड़-खाबड़ व संकरी गलियों में घूमाते है यह देखकर आंसू निकल आते हैं। बेचारे कितनी मेहनत करते हैं। लेकिन इन्हें मजदूरी बहुत कम मिलती है। खैर, मुझे तो जयपुर के रिक्शे की सवारी जिंदगी भर याद रहने वाली है।

Updated on:
15 Jun 2020 08:05 am
Published on:
14 Jun 2020 06:26 pm
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