स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 में अच्छी रैंकिंग की दौड़ शुरू हो गई है। मगर दोनों ही नगर निगम में अधिकारी अब भी फील्ड में जाने से परहेज कर हैं। एसी कमरों में बैठकर ही शहर की रैंकिंग सुधारने के ख्वाब देखे जा रहे हैं।
स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 में अच्छी रैंकिंग की दौड़ शुरू हो गई है। जयपुर नगर निगम ग्रेटर महापौर सौम्या गुर्जर और हैरिटेज महापौर मुनेश गुर्जर सड़कों पर उतरकर सफाई व्यवस्था का निरीक्षण कर रही हैं। ताकि शहर को स्वच्छ दिखाकर रैंकिंग सुधारी जा सके। मगर दोनों ही महकमों में अधिकारी अब भी फील्ड में जाने से परहेज कर हैं। एसी कमरों में बैठकर ही शहर की रैंकिंग सुधारने के ख्वाब देखे जा रहे हैं।
ग्रेटर नगर निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव ने दर्जनों अधिकारियों और कर्मचारियों की सफाई व्यवस्था निरीक्षण में ड्यूटी लगा रखी है, लेकिन कई कार्मिक अब भी फील्ड से परहेज करते नजर आ रहे हैं। खुद आयुक्त भी फील्ड में नहीं उतरे हैं। पिछले कई महीनों से वो अपने दफ्तर में बैठकर ही शहर को स्वच्छ करने की प्लानिंग कर रहे हैं। यहां तक कि उनके कक्ष में किसी आम आदमी को प्रवेश नहीं है। खुद वो कमरे के बाहर आकर ही जनता दरबार लगा रहे हैं। ऐसे में सफाई रैंकिंग सुधरने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
हैरिटेज में भी कमोबेश यही हाल
हैरिटेज नगर निगम में भी कमोबेश ऐसा ही हाल है। यहां भी महापौर मुनेश गुर्जर खुद सफाई व्यवस्था को जांच रही हैं, लेकिन अधिकारियों का काम अब भी संतोषजनक नहीं है। आयुक्त अवधेश मीणा ने सफाई व्यवस्था जांचने के लिए कार्मिकों की ड्यूटी लगा रखी है, लेकिन ज्यादातर मौके पर जा ही नहीं रहे हैं। इसके चक्कर में मीणा ने जोन उपायुक्तों को फील्ड में जाने के लिए अलग से आर्डर जारी करने पड़े हैं।
शहर में फैला पड़ा है कचरा
अधिकारियों के ढुलमुल रवैये का ही नतीजा हे कि शहर में कचरे के ढेर लगे हैं। खासकर शहर के अंदरूनी इलाकों से कचरा नहीं उठ रहा है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है, जबकि पिछली बार सर्वेक्षण में टीम ने अंदरूनी इलाकों का ही निरीक्षण किया था।