जयपुर

व्यवस्थित विकास को ठेंगा…अप्रूव्ड कॉलोनियों से दो गुना तेजी से बस रहीं अवैध

राजधानी में बढ़ती आबादी के साथ लोगों में भूखंड खरीदने की चाह बढ़ रही है। मांग की तुलना में वैध कॉलोनियां कम सृजित हो रही हैं। यही वजह है कि अप्रूव्ड कॉलोनियों से दो गुना अवैध कॉलोनियां शहर के आस-पास सृजित हो रही हैं। हालांकि, जेडीए इनको रोकने के लिए कार्रवाई करता है। कुछेक को […]

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Dec 30, 2024

राजधानी में बढ़ती आबादी के साथ लोगों में भूखंड खरीदने की चाह बढ़ रही है। मांग की तुलना में वैध कॉलोनियां कम सृजित हो रही हैं। यही वजह है कि अप्रूव्ड कॉलोनियों से दो गुना अवैध कॉलोनियां शहर के आस-पास सृजित हो रही हैं। हालांकि, जेडीए इनको रोकने के लिए कार्रवाई करता है। कुछेक को छोड़ दें तो ज्यादातर कॉलोनियां सृजित हो ही जाती हैं।

राजधानी जयपुर की बात करें तो पिछले तीन वर्ष में करीब 400 कॉलोनियां अनुमोदित हुई हैं। वहीं, जेडीए की प्रवर्तन शाखा ने 734 अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की है।

तीन माह में 107 पर एक्शन

पिछले तीन माह में 107 अवैध कॉलोनियों पर पीला पंजा चल चुका है। इनमें से कई अवैध कॉलोनियां ऐसी भी हैं, जिन पर दो से तीन बार जेडीए ने कार्रवाई की है। मौजूदा समय की बात करें तो जेडीए में प्रवर्तन अधिकारियों की भी कमी है। ऐसे में एक ईओ के पास दो से तीन जोन का काम है।

लोग चले जाते अवैध की ओर

जेडीए आवासीय योजनाएं लेकर आया है, उनमें आरक्षित दर 14 हजार से 18 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर तय की गई है। वहीं निजी विकासकर्ता आवासीय योजनाएं लेकर आते हैं, उनकी दर भी 20 हजार से 25 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर तक होती है। अवैध कॉलोनी की कीमत छह हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर से शुरू हो जाती है। ये कॉलोनियां कृषि भूमि का बिना भू-रूपांतरण कराए, इकोलॉजिकल जोन से लेकर रिक्रिएशनल, सरकारी भूमि, मंदिर माफी और सेक्टर रोड से प्रभावित जमीन पर सृजित कर देते हैं।

-कुछेक कॉलोनियां तो प्रस्तावित सेक्टर रोड में ही अवैध रूप से बसा दी गई हैं। सिरसी रोड पर राज विहार-प्रथम नाम से एक अवैध कॉलोनी सृजित की गई है। इस कॉलोनी का बड़ा हिस्सा सेक्टर रोड से प्रभावित है। जबकि, मौके पर यहां लोग घर बनाकर रह रहे हैं।

Updated on:
30 Dec 2024 12:32 am
Published on:
30 Dec 2024 12:31 am
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