
कटकड़ (हिण्डौन सिटी). गांव कटकड़ स्थित चटिकना हनुमानजी मंदिर पर संत मुरली दास के सानिध्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में गत दिवस गोवर्धन पूजा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण ‘गिरिराज महाराज की जय’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भाग लेकर आयोजन का स्वरूप गिरिराज महाराज की भक्ति से सराबोर हो गया।
भागवताचार्या देवी रुक्मिणी ने कथा में प्रवचन करते हुए गोवर्धन लीला का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा आरंभ की थी। इससे देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और मूसलाधार वर्षा करने लगे। इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों और उनके पशुओं को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी की रक्षा की। कथावाचिका ने कहा कि श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि इसमें गहरे आध्यात्मिक, नैतिक और पर्यावरणीय संदेश निहित हैं। इस लीला से भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार को नष्ट किया और भक्तों को यह शिक्षा दी कि सच्ची भक्ति प्रेम और सेवा में होती है। श्रद्धालुओं ने जयकारों और भक्ति गीतों के साथ पूजा में भाग लिया। आयोजन समिति ने बताया कि कथा महोत्सव के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हो रहे हैं और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।
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हिण्डौनसिटी. कटकड़ में हनुमान मंदिर पर भागवत कथा में प्रवचन करती रुक्मिणी देवी तथा मौजूद श्रद्धालु।