.जनता के लिए पेयजल संकट का सबब बने बिजली के प्री-पेड मीटर खरीद में राजस्थान डिस्कॉम ने निजी कंपनियों पर 'मेहरबानी' दिखाई। पहले 6765 रुपए में थ्री फेज मीटर खरीद पर मुहर लगा दी, पर कंपनी को ऑर्डर से ऐन पूर्व प्रतिस्पद्र्धा बढ़ाने का तर्क देकर 43 हजार मीटरों की खरीद प्रक्रिया निरस्त कर दी।
फिर प्रक्रिया में निजी कंपनियों ने मीटर दर 10,500 रुपए पहुंचा दी। बावजूद इसके डिस्कॉम ने मोलभाव के नाम पर सिर्फ 1000 रु. घटा 3 कंपनियों को 9500 रु. प्रति मीटर के हिसाब से काम दे दिया। एक वर्ष के दरमियान हुए खेल में प्रति मीटर 2735 रु. ज्यादा चुकाने होंगे (40 त्न अधिक), जिससे डिस्कॉम को 12 करोड़ रुपए का फटका लगा। चौंकाऊ बात है, जो फर्म एक साल पूर्व कम दाम (6765 रु.) पर मीटर देने को राजी थी, डिस्कॉम उससे अभी 9500 रुपए में ही मीटर खरीद रहा है।
73883 सिंगल फेज प्री-पेड मीटर- 30000
43883 प्री-पेड मीटर खरीद पर कुल खर्च-56.18 करोड़
12 करोड़ की चपत लगी पुरानी निविदा निरस्त करने से
डिस्कॉम का तर्क है कि करंट रेटिंग क्षमता में वृद्धि से दाम 40 फीसदी ज्यादा आए। वहीं विशेषज्ञों की माने तो इसके बाद भी लागत अधिकतम 15 फीसदी तक बढ़ेगी। आश्चर्य है, एचपीएल ने करंट रेटिंग 10-60 एएमपी व 20-80 एएमपी के मीटर की एकसमान कीमत लगाई थी।
डिस्कॉम्स सीएलपीसी बैठक में थ्री फेज मीटर 6765 रु. में खरीद को हरी झंडी दी तो समीक्षा क्यों की गई?
तत्कालीन अजमेर डिस्कॉम एमडी ने थ्री फेज का मामला बोर्ड में ले जाने का प्रस्ताव रखा, बावजूद इसके किस दबाव में अफसरों ने सीधे निविदा प्रक्रिया निरस्त कर दी?
एक साल बाद नई निविदा में थ्री फेज के न्यूनतम दाम एचपीएल ने 10,440 रु. लगाए, जबकि ये कंपनी पहले 6,765 रु. में मी. देने को तैयार थी?
एमएम ने प्रस्ताव में दाम ज्यादा बढऩे का जिक्र किया। फिर भी किस दबाव में एक हजार रुपए कम घटा 9,500 रु. में मीटर खरीद का फैसला लिया?
स्टेडी रिपोर्ट भी पूरी तरह दरकिनार
डिस्कॉम ने खरीद से पहले दूसरे राज्यों में टीम भेजी। पता चला कि नई तकनीक से थ्री फेज मीटर 7-8 हजार व सिंगल फेज की कीमत 4-5 हजार है। विशेषज्ञों की माने तो दो साल में नई तकनीक के आइटम के दाम में कमी ही आती है। फिर भी डिस्कॉम ने दो साल पहले के दामों से अधिक पर मीटर खरीद को हरी झंडी दी।'
जयपुर डिस्कॉम तत्कालीन एमडी अर्जुन सिंह
14 अगस्त 2014 : कॉरपोरेट लेवल परचेज कमेटी (सीएलपीसी) की बैठक में आया कि एचपीएल इलेक्ट्रॉनिक्स पावर लि. सिंगल फेज मीटर 4932 रु . व थ्री फेज 6905 रु. में देने को तैयार है। जीनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लि. व सिक्योर मीटर की दर ज्यादा है। ऐसे में दोनों कंपनियों से बातचीत व एल1 फर्म से दाम और घटाने पर चर्चा करना तय हुआ।
28 अगस्त 2014 : एचपीएल सिंगल फेज 4882 रु. व थ्री फेज 6835 रु. में तैयार थी, अन्य दोनों ने सिर्फ सिंगल फेज में प्रस्ताव माने। चर्चा पर एचपीएल ने संपूर्ण ऑर्डर के लिए सिंगल फेज मी. 4832 रु. व थ्री फेस 6765 रु. में देने की हामी भरी। कमेटी ने तय किया, एचपीएल को सिंगल फेज 25,000 व थ्री फेज के 42,000 मी. का ऑर्डर दिया जाए।
1 सितम्बर 2014 : सीएलपीसी बैठक के फैसले पर अजमेर डिस्कॉम के एमडी के अलावा सभी 6 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए। अजमेर एमडी ने एचपीएल के अनुभव पर सवाल खड़े करते मामला बोर्ड में भेजने की सिफारिश की।
डिस्कॉम तत्कालीन कार्यकारी एमडी जीआर चौधरी
12 सितम्बर 2014 : बैठक में प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से चर्चा की। सहमति पर एचपीएल को 13, 206, सिक्योर को 11,639 व जीनस को 5155 सिंगल फेज मीटर का ऑर्डर 4832 रु. प्रति के हिसाब से तय हुआ। थ्री फेज की प्रक्रिया को प्रतिस्पद्र्धा नहीं होने का तर्क देकर निरस्त कर दिया।
जयपुर डिस्कॉम सीएमडी भास्कर ए सावंत
6 जुलाई 2015 : नई निविदा प्रक्रिया के तहत फिर उन्हीं तीनों कंपनियों ने थ्री फेज मीटर का प्रस्ताव दिया। बस अंतर ये रहा कि इस बार सभी ने मीटर के दाम 10 हजार से अधिक बताए।
20 जुलाई 2015 : बैठक में मामला उठा। एमएम विंग ने पुरानी प्रक्रिया का हवाला देते मौजूदा प्रस्ताव रखे। तय हुआ, दूसरे राज्यों से दामों की समीक्षा की जाए। कंपनियों से भी दाम घटाने पर चर्चा हो।
6 अगस्त 2015 : बैठक में एक राय से फैसला हुआ, थ्री फेज मीटर 9500 में खरीद लेंं। एचपीएल को 12,849, सिक्योर को 14,334 व जीनस को 16,700 मीटर का ऑर्डर तय किया गया।
तकनीकी बदलाव से नई निविदा में दाम बढ़े। ये तो विशेषज्ञ ही बता सकते है कि करंट क्षमता में वृद्धि से मीटर कीमत पर कितना फर्क पड़ता है। फिर भी गड़बड़ी की बात सामने आ रही है तो उसे दिखवाएंगे।
पुष्पेंद्र सिंह, ऊर्जा राज्यमंत्री