जयपुर. अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से आने वाले पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे अगरबत्ती और धूपबत्ती उद्योग के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। बाजार में स्टॉक कम होते ही 10 रुपए में बिकने वाला पैकेट अब 13 रुपए तक पहुंच गया है, […]
जयपुर. अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से आने वाले पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे अगरबत्ती और धूपबत्ती उद्योग के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। बाजार में स्टॉक कम होते ही 10 रुपए में बिकने वाला पैकेट अब 13 रुपए तक पहुंच गया है, वहीं कई कंपनियों ने पैकेट के भीतर अगरबत्तियों की संख्या भी घटा दी है।
प्रदेश में अगरबत्ती का करीब 250 करोड़ का कारोबार है, जिसमें अकेले जयपुर की हिस्सेदारी 100 करोड़ से अधिक है। कच्चा माल न मिलने से उत्पादन में भारी गिरावट आई है, जिसका सबसे बुरा असर उन लाखों महिलाओं और ग्रामीण कामगारों पर पड़ा है जो घर-घर बैठकर इस असंगठित क्षेत्र से रोजी-रोटी कमाते हैं। इनपर बेरोजगारी का खतरा मंडरा रहा है।
ऑल राजस्थान अगरबत्ती मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की मंगलवार को बैठक हुई। कच्चा माल नहीं मिलने से अगरबत्ती व धूप उत्पादों के मूल्य में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि करने का निर्णय लिया, जिसे जल्द ही लागू करने पर सहमति बनाई।
40 फीसदी तक महंगा हुआ कच्चा माल
अगरबत्ती के लिए जरूरी कच्चे माल की कीमतों में 35 से 40 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि हो चुकी है। ईरान और अन्य खाड़ी देशों से माल आना लगभग बंद है। अगर यही स्थिति रही तो उत्पादों के मूल्य में 20 से 25 प्रतिशत तक की और वृद्धि करना हमारी मजबूरी होगी।
- दिनेश परनामी, अध्यक्ष, ऑल राजस्थान अगरबत्ती मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन
100 करोड़ का जयपुर का बाजार प्रभावित
जयपुर में ही 100 करोड़ से अधिक का अगरबत्ती कारोबार होता है। विदेशों से मिले कई बड़े ऑर्डर कच्चे माल की कमी के कारण अटके हुए हैं। आपूर्ति शृंखला टूटने से न केवल स्थानीय बाजार प्रभावित हो रहा है, बल्कि निर्यात पर भी ब्रेक लग गया है।
- हिमांशु खंडेलवाल, कोषाध्यक्ष, ऑल राजस्थान अगरबत्ती मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन