नफरी का टोटा, जांच में रोड़ा

प्रदेश के अति संवेदशनशील जिलों में शामिल दौसा जिले की पुलिस वर्तमान में नफरी की कमी से जूझ रही है। ऐसे में जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा मामलों की समय पर जांच पूरी करने में पुलिस प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। 

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Dec 12, 2015
प्रदेश के अति संवेदशनशील जिलों में शामिल दौसा जिले की पुलिस वर्तमान में नफरी की कमी से जूझ रही है। ऐसे में जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा मामलों की समय पर जांच पूरी करने में पुलिस प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं।

खास बात यह है कि सब कुछ जानते हुए भी राजधानी में बैठे पुलिस उच्चाधिकारी जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा लम्बित मामलों का निस्तारण के लिए कार्रवाई की धमकियां देकर जिला पुलिस अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन नफरी की कमी को दूर करने की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

नतीजन, जिले के थानों में लम्बित मामलों की संख्या बढ़ रही है। वर्तमान में जिले के पुलिस बेड़े में स्वीकृत पदों के मुकाबले 24 प्रतिशत पद रिक्त चल रहे हैं। इनमें सर्वाधिक पद सहायक उप निरीक्षक व हैड कांस्टेबलों के हैं। इसके अलावा कांस्टेबलों की भी कमी है। इसके चलते पुलिस प्रशासन को कानून व्यवस्था बनाए व लम्बित मामलों का निस्तारण करने परेशानी झेलनी पड़ रही है।

यह है स्थिति
जिला पुलिस के बेड़े में पुलिस अधीक्षक से कांस्टेबल तक के कुल 1611 पद स्वीकृत हैं। इनमें से वर्तमान में 24 प्रतिशत यानी 281 व 100 (प्रशिक्षण में चल रहे कांस्टेबल) पद रिक्त हैं। पुलिस निरीक्षक के स्वीकृत 12 पदों में से 4, उप निरीक्षक के स्वीकृत पद 58 में से 8, सहायक उप निरीक्षक के स्वीकृत 126 पद में से 85, हैड कांस्टेबलों के 196 में से 97 तथा कांस्टेबलों के 1212 पदों में से 88 पद रिक्त चल रहे हैं। इसके अलावा 120 कांस्टेबल प्रशिक्षण में चल रहे हैं। ऐसे में फिलहाल उन्हें थानों पर तैनात नहीं किया जा सकता है।

जांच अधिकारियों पर बढ़ रहा बोझ
थानों में जांच अधिकारियों की कमी के कारण दर्ज होने वाले मामलों का बोझ कार्यरत जांच अधिकारियों पर बढ़ता जा रहा है। जांच अधिकारी पुराने मामलों का निस्तारण नहीं कर पाते और नए मामले और सौंप दिए जाते हैं।

इससे कार्यरत जांच अधिकारियों का दिन का चैन व रात की नींद उड़ी हुई है। खास यह है कि अब पुलिस अधीक्षक प्रतिमाह जांच अधिकारियों की क्लास लेकर मामलों की समीक्षा करेंगे। इससे मामलों की बढ़ती संख्या को देखकर जांच अधिकारियों के पसीने छूटने लगे हैं।

वर्तमान में थानों में कार्यरत जांच अधिकारियों के पास 10 से 15 फाइलों का बोझ पड़ा हुआ है। यदि नफरी की कमी को जल्द पूरा नहीं किया गया तो कार्यरत जांच अधिकारी काम के बोझ के चलते मामलों का समय पर निस्तारण नहीं कर पाएंगे और उन पर कार्रवाई की तलवार भी लटक जाएगी।

कांस्टेबल करते प्राथमिक जांच
थानों में जांच अधिकारियों की कमी के चलते अधिकतर थानों में आए दिन होने वाले मारपीट व अन्य मामलों की प्राथमिक जांच कांस्टेबलों से कराई जाती है। मामले में सत्यता होने पर मामला दर्जकर जांच अधिकारियों को जांच सौंपी जाती है। इससे कई बार पीडि़त को समय पर न्याय नहीं मिल पाता है।

16 प्रतिशत मामले लम्बित
नफरी की कमी होने से जिले के थानों में दर्ज होने वाले मामलों का समय पर निस्तारण नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि कार्यरत जांच अधिकारियों पर गश्त के साथ मामलों के निस्तारण का भी बोझ बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में जिले के थानों में 16 प्रतिशत मामले लम्बित चल रहे हैं।

थानाप्रभारी उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मामलों के निस्तारण के लिए जांच अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं। ऐसे में जल्दबाजी में कुछ मामलों की जांच सही तरह से नहीं होने का भी खतरा बना हुआ है।

नफरी की कमी के कारण थानों में मामलों के समय पर निस्तारण करने व कानून व्यवस्था बनाए रखने में परेशानी आ रही है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। कुछ दिनों में पदोन्नति का कार्य पूरा होने के बाद नफरी की कमी पूरी हो जाएगी।
योगेश यादव पुलिस अधीक्षक, दौसा
Published on:
12 Dec 2015 09:48 pm
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