
जयपुर। चिकित्सा विभाग की ओर से एक दिन पहले सेवारत डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.अजय चौधरी, उपाध्यक्ष डॉ.वर्ष सक्सैना का तबादला किए जाने के बाद सेवारत डॉक्टरों में आक्रोश बुधवार को बढ़ गया। जयपुर में प्रमुख शासन सचिव वीनू गुप्ता की ओर से जिला टीबी अधिकारियों की आयोजित वीडिया कांफ्रेंसिंग का भी कई जिलों के डॉक्टर अधिकारियों ने बहिष्कार किया।
राजधानी में आंशिक असर
प्रदेश भर में दो घंटे का ओपीडी बहिष्कार किए जाने की भी जानकारी मिली है। हालांकि राजधानी जयपुर में इसका असर आंशिक ही रहा। गौरतलब है कि डॉ.चौधरी को चूरू के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पद से हटाकर हिंडौन के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और डॉ.वर्षा सक्सैना का तबादला सिरोही जिले में कर दिया गया था।
हक की लडाई अपराध नहीं
उधर, संघ के अध्यक्ष डॉ.अजय चौधरी ने चेतावनी दी है कि सरकार ने इस तरह का निर्णय कर 6 नवंबर के बाद अब 6 दिसंबर से एक और आंदोलन के लिए डॉक्टरों को मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि यदि हक की लडाई लडना अपराध है तो वे इस तरह की लडाई लडते रहेंगे। उधर, सेवारत चिकित्सक संघ के पदाधिकारियों ने इस निर्णय का विरोध करते हुए आंदोलन की तैयारी कर ली है। आगे की रणनीति तय करने के लिए गुरुवार को जयपुर में संघ की जनरल बॉडी मीटिंग बुलाई गई है।
सख्त कार्रवाई के निर्देश
चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्यों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को औचक निरीक्षण कर ऐसे डॉक्टरों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही किसी भी मांग के लिए कार्य बहिष्कार करने से पहले भी अनुमति लेनी होगी। ऐसा नहीं करने और अनुपस्थित मिलने पर राजकीय नियमों के अनुसार सख्त कार्यवाही की जाएगी। सराफ ने बताया कि सभी जिला कलक्टरों को चिकित्सालय समय के दौरान कार्य बहिष्कार करने वालों के विरूद्ध राजकीय सेवा नियमों के तहत कार्यवाही करने के निर्देष दिए गए हैं।