मुख्य सचिव उषा शर्मा का कहना है कि प्रदेश में जहां भी भेड़ निष्क्रमण होता है,वहां इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाया जाए जिससे भेड़पालकों को परेशानी नहीं हो।
मुख्य सचिव उषा शर्मा का कहना है कि प्रदेश में जहां भी भेड़ निष्क्रमण होता है,वहां इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाया जाए जिससे भेड़पालकों को परेशानी नहीं हो। मुख्य सचिव ने मंगलवार को शासन सचिवालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षकों को इस संबंध में निर्देश दिए। गौरतलब है कि प्रदेश के 19 जिलों में एक जुलाई से 31 अक्टूबर तक स्थाई भेड़ निष्क्रमण होगा। इस दौरान पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. भवानी सिंह ने निष्क्रमण प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि भेड़पालन में राजस्थान देश में चौथे स्थान पर है।संवेदनशील जिलों में विशेष व्यवस्था
डॉ.राठौड़ ने बताया कि कोटा, बूंदी, चित्तौड़, करौली, भीलवाड़ा, अलवर,झालावाड़ सहित कुल 7 जिले इस संबंध में संवेदनशील है जबकि बूंदी पूर्णतया संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि सभी 19 जिले जहां से भेड़ निष्क्रमण होगा वहां चेक पोस्ट बनाए गए हैं जहां प्र्याप्त दवाई और टीके उपलब्ध होंगे साथ ही नियंत्रण कक्ष की स्थापना की जाएगी। इस दौरान भेड़पालकों का पंजीयन कर परिचय पत्र जारी किए जाएंगे जिससे उन्हें कोई परेशानी नहीं हो। इस अवसर पर पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ.आनंद सेजरा और डॉ.नवीन मिश्रा मौजूद रहे।