जयपुर

उदयपुर में कैश कांड: रोडवेज बस में 46 नहीं 92 लाख थे, पुलिस ने एक थैली पकड़ी, दूसरी कंडक्टर घर ले गया

उदयपुर के केवड़ा चौकी क्षेत्र में 46 लाख की बरामदगी के बाद मामला उलझ गया। बस में मौजूद दूसरी थैली कंडक्टर घर ले गया और सात दिन छिपाकर रखी। व्यापारी की शिकायत पर जांच में बैग 30 नवंबर को कंडक्टर के घर से मिल गया। पुलिस अब पूरी घटना की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

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Dec 04, 2025
24 नवंबर को जावर माइंस थाने में नोटों की गिनती करता पुलिसकर्मी (फोटो- पत्रिका)

उदयपुर: 10 दिन पहले उदयपुर के केवड़ा पुलिस चौकी क्षेत्र में बांसवाड़ा आ रही रोडवेज बस से 46 लाख रुपए की बरामदगी के मामले में नया मोड़ आ गया। बस में दो थैलियों में 46-46 लाख रुपए थे। पुलिस ने एक थैली जब्त कर ली, जबकि दूसरी छिपी रह गई थैली रोडवेजकर्मी अपने घर ले गया और करीब सात दिन तक किसी को नहीं बताया।

बांसवाड़ा के एक गोल्ड कारोबारी लोकेश जैन ने दो कर्मचारी कूपड़ा (बांसवाड़ा) निवासी अनिल (25) पुत्र लक्ष्मण और नरेश (19) पुत्र कालू को 24 नवंबर को उदयपुर में एक व्यापारी को सोना बेचने के लिए भेजा। सोना बेचकर 46-46 लाख, कुल 92 लाख रुपए की दो थैलियां दो बैग में रखकर उदियापोल बस स्टैंड से 11:40 पर रोडवेज में बैठ रवाना हुए।

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लोकेश जैन ने 12:30 बजे दोनों कार्मिकों को एक-एक कर कॉल किया तो फोन स्विच ऑफ थे। पता करने पर जैन को जानकारी मिली कि सलूंबर जिले की जावरमाइंस थाना पुलिस ने रोडवेज बस की तलाशी में राशि पकड़़ ली व अनिल तथा नरेश को गिरफ्तार कर लिया। 46 लाख बरामद होने की आधिकारिक जानकारी व्यापारी को मिली तो उनके हाथ-पैर फूल गए कि बाकी 46 लाख रुपए कहां गायब हो गए।

पुलिस ले जा रही थी, उन्होंने कंडक्टर को इशारों में बता दिया…

व्यापारी ने अगले ही दिन 25 नवंबर को जयसमंद कोर्ट में जमानत अर्जी लगाई, जहां से दोनों की जमानत हो गई। व्यापारी ने पूछा तो उनके दोनों कर्मचारियों ने पुलिस के पास एक ही बैग होने की बात बताई। दूसरा बैग सीटों के ऊपर लगेज रखने की लोहे की जाली में रखा था। दोनों ने उतरने से पहले कंडक्टर को उस बैग का ध्यान रखने को कहा।

26 को लिखित में शिकायत की, तब खुला मामला

व्यापारी लोकेश जैन 26 नवंबर को उदयपुर पहुंचे और सोने के खरीदार व्यापारी को लेकर पुलिस महानिरीक्षक गौरव श्रीवास्तव के समक्ष पेश हुए। उन्होंने सभी बिल-वाउचर और लिखित में एक शिकायत देकर पूरी राशि दिलाने की मांग की। आईजी ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। जैन ने पत्रिका को बताया कि उसके बाद अब तक क्या कार्रवाई हुई, उसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। पुलिस ने भी उनसे कोई संपर्क नहीं किया।

पूरे 46 लाख रुपए जब्त कर लिए

आईजी के विशेष निर्देश पर बांसवाड़ा डीएसपी गोपीचंद मीणा और शहर कोतवाल रूप सिंह जांच कर रहे हैं। डीएसपी गोपीचंद ने बताया, हमने सलूंबर से कुछ डिटेल ली और जांच-पड़ताल शुरू की। संबंधित कंडक्टर को तलाशकर पूछताछ की। उसने बताया था कि रुपयों भरा बैग उसके घर पर है। टीम भेज कर बैग को बरामद कर लिया।

कंडक्टर बोला- मुझे नहीं पता था, पैसा किसको देना है

जांच टीम को कंडक्टर ने बैग में से 21000 रुपए कम होने की बात कही थी। गिनती की तो रुपए पूरे थे। पुलिस ने यह पैसा मालखाने में रखवा दिया। पूछताछ में कंडक्टर ने बताया, मुझे यह पता ही नहीं था कि यह रुपए मुझे देने किसको है, इसलिए इनको मैं घर लेकर चला गया था।

अनसुलझे सवाल: क्या जांच में मिल पाएंगे जवाब?

  • रोडवेज कंडक्टर ने इतनी बड़ी राशि मिलने पर अपने उच्चाधिकारियों को सूचना क्यों नहीं दी?
  • 46 लाख रुपए भरा बैग 7 दिन तक उसने अपने घर पर क्यों रखा?
  • अगर राशि वैध थी, तो गिरफ्तार दोनों कार्मिकों ने दूसरे बैग की जानकारी पुलिस से क्यों छिपाई?
  • पुलिस ने किस रोडवेज कर्मचारी के घर से यह राशि कब बरामद की?
  • रोडवेज आगार प्रबंधक को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई?
  • इतने बड़े मामले में अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई?
  • सलूंबर-उदयपुर पुलिस की तीन टीमों की कार्रवाई के दौरान एक बैग उनकी नजर से कैसे बचा रहा?
  • जिस बस में कार्रवाई हुई, उसी बस में जांच टीम से अलग एक पुलिस अधिकारी का मौजूद होना क्या सिर्फ संयोग था?

घटनाक्रम की टाइमलाइन

  • 24 नवंबर: बस से 46 लाख रुपए बरामद
  • 25 नवंबर: दोनों रोडवेज कार्मिकों को अदालत से जमानत मंजूर
  • 26 नवंबर: दोनों व्यापारी आईजी के समक्ष पेश
  • 30 नवंबर: रोडवेज कर्मचारी के घर से 46 लाख रुपए और बरामद

पुलिस अधिकारी जयसिंह राव उसी बस में सवार थे, इसलिए यह अफवाह फैली कि रुपए उनके पास हैं, जबकि हमने यह राशि कंडक्टर की निशानदेही पर उसके घर से बरामद की है।
-गोपीचंद मीणा, जांच अधिकारी व पुलिस उप अधीक्षक, बांसवाड़ा

अभी कुछ नहीं बता सकता, जांच जारी है, यह एक पेचीदा मामला है। जांच की जा रही है। जब तक फाइनल जांच रिपोर्ट नहीं आएगी, कुछ भी नहीं बता पाएंगे।
-गौरव श्रीवास्तव, पुलिस महानिरीक्षक, उदयपुर रेंज

हमारे कर्मचारी से लाखों रुपए की जब्ती की सूचना हमें नहीं है। न पुलिस ने, न कर्मचारी ने कुछ बताया है।
-मनीष जोशी, मुख्यप्रबंधक, रोडवेज आगार, बांसवाड़ा

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Published on:
04 Dec 2025 02:02 pm
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