
आज भी दाऊजी महाराज को साक्षी मानकर होते हैं फैसले
रियासतकाल में लगती थी कचहरी
सिकराय. धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध सिकराय कस्बे का करीब 245 वर्ष पुराना दाऊजी महाराज मंदिर आज भी लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलदाऊजी महाराज को समर्पित इस मंदिर से कई ऐसी मान्यताएं जुड़ी हैं, जिन पर कस्बे सहित आसपास के ग्रामीणों का आज भी अटूट विश्वास है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि दाऊजी महाराज के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनौती पूरी होती है।
बारिश रोकने के लिए आज भी बोलते हैं प्रसाद का थाल
मंदिर से जुड़ी सबसे अनोखी मान्यता बारिश को लेकर है। ग्रामीणों के अनुसार शादी या अन्य सामाजिक आयोजन के दौरान अचानक बारिश शुरू होने पर लोग दाऊजी महाराज के मंदिर में प्रसाद का थाल बोलते हैं। मान्यता है कि इसके बाद बारिश थम जाती है और आयोजन निर्विघ्न संपन्न हो जाता है। वर्षों पुरानी इस परंपरा को लेकर आज भी लोगों की आस्था कायम है।
रियासतकाल में यहीं लगती थी कचहरी
मंदिर के पुजारी सत्यनारायण शर्मा ने बताया कि मंदिर के लिए जयपुर राजपरिवार की ओर से जमीन दी गई थी, जिसका पट्टा भी मौजूद बताया जाता है। रियासतकाल में मंदिर परिसर धार्मिक स्थल के साथ प्रशासनिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र था। यहां कचहरी लगती थी और अधिकारी बैठकर राजकाज से जुड़े कार्यों का संचालन करते थे।
दाऊजी को साक्षी मानकर होते हैं सामाजिक फैसले
रियासतकालीन कचहरी व्यवस्था समाप्त होने के बावजूद मंदिर का सामाजिक महत्व बरकरार है। कस्बे और आसपास के गांवों के लोग सामाजिक मामलों को लेकर मंदिर परिसर में पंचायत करते हैं। पंचायत में दाऊजी महाराज को साक्षी मानकर लिए गए निर्णयों को ग्रामीण स्वीकार कर उनकी पालना करने की परंपरा भी बताई जाती है।
इंटरव्यू के बाद होती थी पुजारियों की नियुक्ति
पुजारी सत्यनारायण शर्मा के अनुसार रियासतकाल में मंदिर के पुजारियों की नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया से होती थी। रियासत के अधिकारी पंडितों का इंटरव्यू लेकर उनके धार्मिक ज्ञान और दक्षता के आधार पर पुजारी नियुक्त करते थे। बताया गया कि वर्ष 1950 में वर्तमान पुजारी रामेश्वर प्रसाद शर्मा की नियुक्ति भी इंटरव्यू प्रक्रिया के माध्यम से हुई थी।
भादवा छठ पर विशेष आयोजन, धार्मिक यात्राएं भी निकलती हैं
बलदाऊजी महाराज मंदिर में भादवा मास की छठ का विशेष महत्व है। इस अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजन होते हैं। मंदिर चौक में पंच-पटेल बैठकर पंचायत भी करते हैं। इसके अलावा समय-समय पर मंदिर से रणथंभौर, मीन भगवान, पपलाज माता, भर्तृहरि और नारायणी माता सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों के लिए यात्राएं भी निकाली जाती हैं।
करीब ढाई शताब्दी पुराना यह मंदिर आज भी धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और सामाजिक परंपराओं का अनूठा संगम बना हुआ है। बदलते दौर में भी दाऊजी महाराज का यह दरबार सिकराय और आसपास के ग्रामीणों के लिए विश्वास, आस्था और सामाजिक एकजुटता का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।