जयपुर। अगर ट्रेन के बाथरूम में आप फंस जाएं और बाहर निकलने का कोई रास्ता न बचे, तो क्या होगा ? न मदद की आवाज पहुंचे, न हवा का रास्ता खुले। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रेस सलाहकार महेन्द्र भारद्वाज को ऐसे ही डरावने अनुभव से गुजरना पड़ा। 30 जनवरी को भारद्वाज कोटा […]
जयपुर। अगर ट्रेन के बाथरूम में आप फंस जाएं और बाहर निकलने का कोई रास्ता न बचे, तो क्या होगा ? न मदद की आवाज पहुंचे, न हवा का रास्ता खुले। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रेस सलाहकार महेन्द्र भारद्वाज को ऐसे ही डरावने अनुभव से गुजरना पड़ा। 30 जनवरी को भारद्वाज कोटा से जयपुर आ रही कोटा-श्रीगंगानगर एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 22981 में यात्रा कर रहे थे। सवाईमाधोपुर से आगे वे ट्रेन के बाथरूम में गए। बाहर निकलते समय अंदर लगी डोर लैच (कुंडी) अचानक फेल हो गई। दरवाजा पूरी तरह जाम हो गया। उन्होंने पूरी ताकत से कुंडी, हैंडल और दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। भारद्वाज ने उनके साथ हुई इस घटना को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।
बाथरूम की बदबू और बंद जगह में हवा की कमी के कारण भारद्वाज घबरा गए। उन्होंने कई बार चिल्लाकर मदद मांगने की कोशिश की, लेकिन ट्रेन की आवाज और दूरी के कारण कोई सुन नहीं सका। उस समय मोबाइल फोन ही उनकी जिंदगी की डोर बना। उन्होंने अपने भाई हरीश शर्मा और बेटे दिव्यांश को फोन कर पूरी स्थिति बताई। रेलवे हेल्पलाइन पर भी संपर्क किया गया, लेकिन शुरुआत में कोई मदद नहीं मिली।
भारद्वाज ने लिखा कि वे धीरे-धीरे घुटन और अवसाद की स्थिति में पहुंच रहा थे। कुछ देर बाद रेलवे को सूचना मिली और तकनीकी कर्मचारी मौके पर पहुंचे। करीब 10 मिनट तक उन्होंने भी दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन कुंडी पूरी तरह जाम थी।
दोनों हाथों से दरवाजे को थामने की कोशिश
आखिरकार दरवाजा तोड़ना पड़ा। बाहर से हथौड़े की मार से दरवाजा तोड़ा गया। यह सबसे जोखिम भरा पल था, क्योंकि दरवाजा टूटते ही अंदर मौजूद व्यक्ति पर गिर सकता था। भारद्वाज ने दोनों हाथों से दरवाजे को थामने की कोशिश की। लेकिन फिर भी दरवाजा उनके हाथों पर गिरा, उन्हें हल्की चोट आई।
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