उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को यहां जयपुर प्रवास के दौरान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के निवास पहुंचकर उनसे मुलाकात की। कोठारी ने उपराष्ट्रपति धनखड़ को राजस्थान पत्रिका के संस्थापक कर्पूर चन्द्र कुलिश द्वारा रचित ग्रंथ शब्द-वेद: की प्रति भेंट की और उसके बारे में जानकारी दी।
जयपुर। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को यहां जयपुर प्रवास के दौरान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के निवास पहुंचकर उनसे मुलाकात की। कोठारी ने उपराष्ट्रपति धनखड़ को राजस्थान पत्रिका के संस्थापक कर्पूर चन्द्र कुलिश द्वारा रचित ग्रंथ शब्द-वेद: की प्रति भेंट की और उसके बारे में जानकारी दी। वहीं दोनों के बीच राष्ट्र के प्राकृतिक संसाधन, संस्कृति और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई प्रमुख बिन्दुओं पर विस्तृत चर्चा की।
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कोठारी से मुलाकात के दौरान प्राकृतिक संसाधनों को राष्ट्र की संप्रभुता से जोड़ने और नई पीढ़ी को वेदों से अवगत कराने का सुझाव दिया। इस दौरान उपराष्ट्रपति धनखड़ के साथ उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ भी मौजूद रहीं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारा आर्थिक राष्ट्रवाद की ओर ध्यान ही नहीं गया। दुनिया में देश अपने कच्चे माल को बाहर नहीं जाने देते, लेकिन हमारे यहां ऐसा नहीं हुआ।
कोठारी ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि हमारे देश में भिलाई में आयरन का बड़ा प्लांट है, जो एक चौथाई ही रह गया। पशुओं की नस्ल हमारे जैसी दूसरी जगह नहीं है, लेकिन यहां पशुओं से जुड़ा कोई उद्योग ही नहीं है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में दुनिया की कॉरपोरेट कंपनियां आ जाती हैं और अपने विवादों का निस्तारण लंदन-पेरिस में कराने को कहती हैं। यहां कुछ करते हैं तो दुनिया में हमारे लोकतंत्र पर सवाल उठाए जाते हैं।
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक कोठारी ने कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि खाने-पीने में जहर पहुंच रहा है और हम बात स्वास्थ्य की कर रहे हैं, यह कहां का विज्ञान है। कोविड के समय पैसा फार्मा कंपनियों के पास गया। मिलेट के बारे में बच्चे जानते नहीं हैं। बीमारियों से बचाव की बात ही नहीं हो रही। इस पर उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि लोग गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए समय ही नहीं दे रहे। मैं राज्यसभा में देखता हूं सांसद तैयारी के साथ नहीं आते हैं।