जयपुर

Waiting List Rule: सुप्रीम कोर्ट ने RPSC के पक्ष को सही ठहराया, रिजर्व लिस्ट से नियुक्ति का स्वतः अधिकार नहीं

Job Recruitment Policy: रिजर्व लिस्ट पर नियुक्ति का अधिकार नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने आरपीएससी को दी बड़ी राहत। भर्ती नियमों की सर्वोच्चता बरकरार, हाईकोर्ट के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने किए निरस्त।

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Jan 18, 2026
supreme Court
सुप्रीम कोर्ट

RPSC, Recruitment News: जयपुर. माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि केवल रिजर्व अथवा वेटिंग लिस्ट में नाम होने से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता एवं न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के एकलपीठ और खंडपीठ के आदेशों को निरस्त करते हुए आयोग के पक्ष में फैसला सुनाया।

मामला कनिष्ठ विधि अधिकारी भर्ती-2013 एवं 2019 तथा सहायक सांख्यिकी अधिकारी भर्ती-2020 से संबंधित था। मुख्य सूची के कुछ चयनित अभ्यर्थियों द्वारा कार्यभार ग्रहण नहीं करने के कारण रिक्त पदों पर रिजर्व सूची के उम्मीदवारों ने नियुक्ति की मांग की थी। इस संबंध में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने आयोग को नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए थे, जिसे बाद में खंडपीठ ने भी बरकरार रखा। इसके विरुद्ध आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।

आयोग ने यह रखा अपना पक्ष

सुनवाई के दौरान आयोग के संयुक्त विधि परामर्शी राकेश ओझा ने पक्ष रखते हुए कहा कि राजस्थान सेवा नियमों के अनुसार रिजर्व सूची की वैधता मुख्य सूची भेजे जाने की तिथि से केवल छह माह तक होती है। अवधि समाप्त होने के बाद सूची स्वतः निष्प्रभावी हो जाती है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि निर्धारित समयसीमा के बाद किसी भी प्रकार की नियुक्ति नियमों के विपरीत मानी जाएगी।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और भर्ती नियमों की रक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा अपील न किए जाने की स्थिति में भी आयोग को न्यायालय में अपील करने का अधिकार है। इससे आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को मजबूती मिलती है।

फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि चयन प्रक्रिया को अनिश्चित काल तक खुला रखा जाए, तो इससे आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे नए अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित होंगे और भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता व अनुशासन खत्म हो सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय ने सहानुभूति के आधार पर नियमों से हटकर नियुक्ति के आदेश को अनुचित बताते हुए हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों को रद्द कर दिया। यह निर्णय भविष्य की भर्तियों में स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करेगा और भर्ती प्रक्रिया की शुचिता को मजबूत करेगा।


📊 एक नजर में यूं समझें पूरे मामले को

क्रमांकविषयमुख्य जानकारी
1️⃣क्या था मामला?कनिष्ठ विधि अधिकारी भर्ती-2013 व 2019 तथा सहायक सांख्यिकी अधिकारी भर्ती-2020 से जुड़ा विवाद। मुख्य सूची के कुछ अभ्यर्थियों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। इसके बाद वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग की। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
2️⃣सुप्रीम कोर्ट का फैसलाकेवल रिजर्व या वेटिंग लिस्ट में नाम होने से नियुक्ति का स्वतः अधिकार नहीं मिलता। रिजर्व सूची केवल 6 माह तक वैध रहती है। समयसीमा समाप्त होने पर सूची स्वतः निष्प्रभावी हो जाती है। हाईकोर्ट के पूर्व आदेश रद्द कर दिए गए।
3️⃣फैसले का असरभर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता मजबूत होगी। नए अभ्यर्थियों के अवसर सुरक्षित रहेंगे। आयोग की स्वायत्तता को बल मिलेगा। भविष्य में ऐसे विवादों पर विराम लगेगा।

Updated on:
18 Jan 2026 10:58 am
Published on:
18 Jan 2026 10:57 am