सड़क तो बना दी, पर पानी कहां जाएगा? यह सवाल हर मानसून में उठता है। नाले अधूरे हैं, आउटलेट नहीं छोड़े गए, बरसात आते ही सड़कें गड्ढों में बदल जाती हैं। बरसात खत्म होने के बाद जेडीए और नगर निगम को 100 करोड़ रुपए से अधिक सिर्फ सडक़ मरम्मत पर खर्च करने पड़ते हैं। अब […]
सड़क तो बना दी, पर पानी कहां जाएगा? यह सवाल हर मानसून में उठता है। नाले अधूरे हैं, आउटलेट नहीं छोड़े गए, बरसात आते ही सड़कें गड्ढों में बदल जाती हैं। बरसात खत्म होने के बाद जेडीए और नगर निगम को 100 करोड़ रुपए से अधिक सिर्फ सडक़ मरम्मत पर खर्च करने पड़ते हैं। अब एक पुख्ता ड्रेनेज मैप बनाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, लोग कह रहे हैं कि अगर पहले ही सड़क के साथ नाले भी बना दिए होते तो इतना खर्च और झंझट ही नहीं होता। जयपुर का ड्रेनेज सिस्टम अब भी अधूरा है और केवल 30 फीसदी हिस्से में ही नेटवर्क मौजूद है, बाकी जगह हर मानसून में जलभराव और सड़क टूटने की समस्या बनी रहती है। ड्रेनेज मैप से न सिर्फ बिखरे हुए सिस्टम को जोड़ा जाएगा, बल्कि उन इलाकों को भी चिन्हित किया जाएगा, जहां मानसून के दिनों में जलभराव होता है।
वॉल टू वॉल पक्का किया
शहर में कई स्थानों पर सडक़ें बनीं, लेकिन उनके साथ ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं की गई। कहीं नाले अधूरे हैं, तो कहीं आउटलेट ही नहीं छोड़ा गया। शहर के ज्यादातर हिस्सों में तो वॉल टू वॉल पक्का कर दिया गया। इससे पानी सडक़ पर ही रहता है। जलभराव होने से सड़कें टूट जाती हैं और गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं।
तो खर्चा आधा
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण के साथ ड्रेनेज नेटवर्क विकसित किया जाता तो खर्च आधा रह सकता था। लेकिन अलग-अलग विभागों की अलग-अलग योजना के चलते ड्रेनेज सिस्टम कभी पूरा नेटवर्क बन ही नहीं पाया।
खास-खास
-15 से 20 किमी अधिकतम सालाना ड्रेनेज लाइन डाल पाता है जेडीए एक वर्ष में (अधिकतम)
-50 करोड़ रुपए सालाना जेडीए खर्च कर रहा है ड्रेनेज लाइन डालने के नाम पर
-4000 करोड़ रुपए को जरूरत है पूरे शहर को ड्रेनेज सिस्टम से जोड़ने के लिए
एक वर्ष का काम
- 12 किमी में सिरसी रोड पर डाली गई है लाइन
-08 किमी में सिरसी रोड पर हुआ है काम
- 03 वर्ष के फिर से ड्रेनेज लाइन डालने के काम को जेडीए ने किया है शुरू
सवाल
-सडक़ बनाते समय ड्रेनेज क्यों नहीं जोड़ा गया?
-हर साल मरम्मत पर करोड़ों खर्च के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं?
-क्या ड्रेनेज के बिना सडक़ निर्माण पर रोक लगेगी?
वीआइपी क्षेत्र में व्यवस्था बेहतर
सिविल लाइन्स क्षेत्र से लेकर जेएलएन मार्ग, टोंक रोड, अजमेर रोड सरदार पटेल मार्ग, पृथ्वीराज मार्ग, प्रताप नगर और जगतपुरा के कुछ हिस्से में ड्रेनेज सिस्टम बेहतर नजर आता है। यहां जलभराव नहीं होता।
::बॉक्स::
228 कॉलोनियों को मिलेगी राहत
250 करोड़ रुपए से जेडीए ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने का जो काम शुरू करेगा। उससे 228 कॉलोनियों में रहने वाले लाखों की आबादी को फायदा होगा। तीन हजार हेक्टेयर से पानी निकलेगा। ये पानी गूलर नगर और द्रव्यवती नदी में छोड़ा जाएगा। जेडीए अधिकारियों की मानें तो ये काम तीन चरणों में काम पूरा होगा। पृथ्वीराज नगर-दक्षिण के सेक्टर रोड पर ड्रेनेज लाइन डाली जाएगी। वहीं, जोन आठ की सेक्टर रोड से लेकर कॉलोनियों में भी ड्रेनेज लाइन विकसित की जाएगी। दोनों जोन में 93 किमी ड्रेनेज बिछाई जाएगी।