हमारा दिया पाठ पढ़ेंगे सार्क  देश

मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय उच्च  शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर रखने जा रहा है। विश्वविद्यालय ने  दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय संगठन (सार्क) के लिए समान पाठ्यक्रम तैयार कर श्रीलंका ओपन यूनिवर्सिटी परडानिया भेजा है। 

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Jul 05, 2015
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मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर रखने जा रहा है। विश्वविद्यालय ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय संगठन (सार्क) के लिए समान पाठ्यक्रम तैयार कर श्रीलंका ओपन यूनिवर्सिटी परडानिया भेजा है।

अक्टूबर में परडानिया में होने वाले सार्क देशों के कुलपति सम्मेलन में इस पाठ्यक्रम को लागू करने विचार-विमर्श किया जाएगा। यह पाठ्यक्रम स्वीकार कर लिया जाता है, तो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

श्रीलंका, भूटान, नेपाल, अफगानिस्तान व बांग्लादेश से भी पाठ्यक्रम के सम्बन्ध में सुझाव मांगे गए हैं। छह विशेषज्ञों ने 15 महीने में सार्क देशों के परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।

दो चरणों की योजना
पहला चरण: श्रीलंका में सार्क देशों के विश्वविद्यालयों के कुलपति राय देंगे। आम सहमति से किसी भी टॉपिक में बदलाव किया जा सकेगा। पाठ्क्रम कब से व कितने विश्वविद्यालयों में लागू किया जाएगा, इस पर भी चर्चा होगी।

दूसरा चरण: सार्क देशों की हॉयर एजुकेशन ऑथिरिटी से पाठ्क्रम को मंजूरी मिलती है तो सार्क देश अपने विद्यार्थियों व एक-दूसरे के यहां भेज सकेंगे। सुविवि ने सिलेबस की

एक की एक कॉपी सार्क यूनिवर्सिटी दिल्ली के लिए भी भेजी है।
इसलिए है उम्मीद : भारत का स्थान विशिष्ट है। साउथ एशियन देशों के काफी संख्या में विद्यार्थी भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्ययन के लिए आते हैं। सुविवि का प्रयास है कि साउथ एशियन देशों के स्टूडेंटस का रूझान राजस्थान की और बढ़े। इसके लिए सुविवि ने अपनी ग्रेडिंग में भी सुधार किया है।

इस प्रकार हुई शुरुआत
अक्टूबर 2013 में सुखाडि़या विवि की पहल पर सार्क देशों के कुलपतियों का सम्मेलन उदयपुर में हुआ था। सम्मेलन में 150 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इसमें पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी सुखाडि़या विवि को सौंपी गई थी। अगले सम्मेलन की मेजबानी के लिए श्रीलंका ने सहमति दी थी।

अक्टूबर में होगी चर्चा
कॉमन पाठ्यक्रम तैयार कर श्रीलंका ओपन यूनिवर्सिटी भेजा है। अक्टूबर में वहां होने वाले कुलपति सम्मेलन में इस पर चर्चा होगी।
प्रो. आईवी त्रिवेदी, कुलपति, सुविवि एवं सार्क देश विश्वविद्यालय समन्वय समिति अध्यक्ष

ये बिन्दु किए गए शामिल
पाठ्यक्रम के लिए विषय का चयन दक्षिण एशिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों में चल रहे पाठ्यक्रमों के आधार पर किया गया है। इसमें छह विषय फिजिक्स, पर्यटन, बॉयो टेक्नोलॉजी, रिमोट सेंसिग, जूलॉजी व फाइन आट्र्स शमिल किए गए हैं। जानकारों का कहना है कि विश्वविद्यालय स्तर पर समरूप पाठ्यक्रम लागू होने से दक्षिण एशियाई देश शिक्षा, सांस्कृतिक व व्यावसायिक रूप से एक-दूसरे के और नजदीक आएंगे।
Published on:
05 Jul 2015 05:07 am