
आर्चरी के खिलाड़ी रजत चौहान का अगला लक्ष्य 2018 में होने वाले एशियाई गेम्स हैं, जिनकी तैयारियों को लेकर वे कड़ी मेहनत कर रहे हैं। जयपुर में रहने वाले रजत ने अनेक सवर्ण व रजत पदक जीतकर राजस्थान का गौरव बढ़ाया हैं।
राजस्थान पत्रिका∙अंतरास्ट्रीयकॉम से की गई बातचीत के दौरान उन्होंने बताया की हाल ही में 2018 की प्रतिस्पर्धाओं के लिए ट्रायल आयोजित किये गये थे, जिसमें उनका भारतीय टीम के लिए चयन हो गया। चयनित खिलाड़़ियों को भारतीय खेल प्राधिकरण की ओर से विश्व स्तर पर होने वाले चैंपियनशिप में प्रभावी प्रदर्शन के लिए ट्रेनिंग सेशन आयोजित होगा।
रजत ने एक ऐसा गेम चुना जिसमे मानसिक रूप से स्थिर होना बहुत आवश्यक है, उन्होंने बेहद छोटी सी उम्र में इस खेल की शुरुआत कर दी थी, बचपन में पढ़ाई में रूचि ना होने के कारण घरवालों ने उन्हें स्पोर्ट्स में जाने का सुझाव दिया, शुरुआत में तो आर्चरी भी टाइम पास के लिए खेला पर बाद में वही उनके पैशन में तप्दील हो गया।
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया की "मैं इतनी बार हारा की मेरे ज़हन से हारने का डर ही निकल गया" और उसके बाद अपनी मेहनत व लगन से इतने पदक जीते की लोग भी कहने लगे की यह कभी नहीं हारेगा , जो लोग अपने बच्चों को मेरे साथ घूमने- फिरने से मना करते थे आज वही लोग सबसे मेरा परिचय करवाते हैं।
एक सवाल के उत्तर में उन्होंने बताया की राजस्थान सरकार खिलाड़ियों को पूरा सहयोग देती है, आर्चरी के इक्विपमेंट बहुत महंगे होते हैं 2.5लाख तो उनकी शुरुवाती रकम है जो सरकार टाइम टू टाइम उन्हें उपलब्ध करवाती हैं।
उन्होंने एशियाई गेम्स 2014 में टीम गोल्ड मैडल जीता हैं वह अर्जुन अवार्डी हैं वह
एशियाई वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल जीतने वाले अब तक के इकलौते खिलाड़ी है।
जैसा की हमारी सहयोगी अदिति यादव को बताया